प्राचीन भारतीय इतिहास-21

अथर्ववेद में सभा और समिति को प्रजापति की दो पुत्रियाँ कहा गया है।

      पाणिनी की अष्टाध्यायी (व्याकरण ग्रन्थ) पर पतंजलि ने महाभाष्य एवं कात्यायन ने वार्तिक लिखा। पाणिनि, पतंजलि और कात्यायन को मुनित्रय कहा जाता है।

      ज्योतिष ग्रन्थ-ज्योतिष का प्रथम ग्रंथ लगध मुनि द्वारा रचित वेदांग ज्योतिष है। अन्य ग्रंथ-गार्गी संहिता, वृहद् संहिता, नारद संहिता स्मृतियाँ हिन्दू धर्म  के कानूनी ग्रंथ हैं ये पद्य में लिखी गयी है। केवल विष्णु स्मृति गद्य में लिखी गयी है।

      मनुस्मृति में सात प्रकार के दास एवं विधवाओं के लिए मुण्डन की बात कही गयी है।

      स्त्रियों की सम्पत्ति सम्बन्धी अधिकार सर्वप्रथम याज्ञवाल्क्य स्मृति में प्रदान किया गया है।

      नारद स्मृति में दासों की मुक्ति का सर्वप्रथम विधान मिलता है।

      देवल स्मृति (पूर्व मध्यकालीन है) इसे विधि विषयक नहीं माना जाता है क्योंकि इसमें उन हिन्दुओं को पुनः हिन्दूधर्म में शामिल करने का विधान मिलता है जिन्होंने मुस्लिम धर्म अपना लिया था।

      विज्ञानेश्वर कृत मिताक्षरा (12वीं सदी) में पिता के जीवन काल में ही पुत्र सम्पत्ति का उत्तराधिकारी माना गया है।

      ऋग्वेद की सबसे प्राचीन संस्था विदथ थी। सभा और समिति राजा पर नियन्त्रण रखती थी। राजा के चुनाव में समिति का महत्वपूर्ण योगदान था। इसके अध्यक्ष को ईशान कहा जाता था।

-शेष अगले भाग में

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