मृदा प्रदुषण के स्त्रोत एवं प्रभाव लिखिए-

मृदा प्रदूषण मृदा में होने वाले प्रदूषण को कहते हैं। यह मुख्यतः कृषि में अत्यधिक कीटनाशक का उपयोग करने या ऐसे पदार्थ जिसे मृदा में नहीं होना चाहिए, उसके मिलने पर होता है। जिससे मृदा की उपज क्षमता में भी बहुत प्रभाव पड़ता है। इसी के साथ उससे जल प्रदूषण भी हो जाता है।
 

 खनन 
 खनन से निकलने वाले मलबे को पास ही के किसी जगह में डाल दिया जाता है। जिससे मलबे के विशाल गर्त बन जाते हैं। इमारती पत्थर, लौह, अयस्क, अभ्रक, ताँबा, आदि खनिजों के उत्खनन से निकलने वाले मलबे मृदा की उर्वरा शक्ति को समाप्त कर देते हैं। वर्षा के समय जल के साथ मिल कर यह मलबे दूर दूर तक जा कर मृदा को प्रदूषित करते हैं।

 औद्योगिक कचरा

 उद्योगों में रासायनिक या अन्य प्रकार के कई कचरे होते हैं, जिसे आसपास या दूर किसी स्थान पर डाल दिया जाता है। इससे उतने हिस्से में मृदा प्रदूषित हो जाता है और उतने भाग में पेड़-पौधे भी उग नहीं पाते हैं।

 जैव स्त्रोत द्वारा मृदा प्रदूषण
 मृदा प्रदूषण के जैव स्त्रोत या कारको के अंतर्गत उन सूक्ष्म जीवो तथा अवांछित पेड़ को शामिल किया जाता है जो मिट्टी की उर्वर शक्ति को कम कर देते है।इन पदार्थों में की हानिकारक जीव जैसे बैक्टीरिया,वॉयरस व अन्य परजीवी मृदा में पनपते हैं

  प्रभाव
पर्यावरण पर
 इसका प्रभाव मुख्यतः पेड़-पौधों पर पड़ता है। इससे आसपास कोई भी पेड़-पौधे जीवित नहीं रह पाते हैं। इसके अलावा उस पर यदि कोई वृक्ष होने पर भी वह खाने योग्य नहीं होता है या उसे अन्य जीव जन्तु द्वारा खाने पर उससे वह बीमार हो जाते हैं। पेड़-पौधे की कमी से जीवों के भोजन में भी कमी आ जाती है। अर्थात आस पास के सभी जीवन चक्र पर इसका प्रभाव पड़ता है।
 मनुष्यों पर प्रभाव
 मनुष्यों के भोजन हेतु कृषि आविष्कारक है किंतु अत्यधिक मृदा प्रदुषण के करण तथा:रसायनिक खदों के प्रयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति समाप्त हो चुकी है जिससे अनाज उत्पादन में भारी मात्रा में काम आई है, जिस से संपूर्ण मानव जाति के जीवन यापन में समय का सामना करना पड़ा रहा है

इस तरह की दूसरी दुषित भूमि से उत्पन्न फल सब्जियां खाने से मनुष्य अनेको गंभीर बिमारीयों से ग्रास्ट हो जाता है जो की मनुश्य की संपूर्ण कार्यविधि प्रभावित है |
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