संसदीय व्यवस्था का या निश्चित सिद्धांत है कि कानून और प्रशासन पर नियंत्रण के अंतिम शक्ति लोकप्रिय है सदन अर्थात लोकसभा को प्राप्त होती है। भारतीय संविधान में भी लोकसभा को राज्यसभा की तुलना में उचित स्थान प्रदान किया है। संसद लोकसभा राज्यसभा तथा राष्ट्रपति से मिलकर बनती है लेकिन लोकसभा संसद की सबसे महत्वपूर्ण इकाई है लोकसभा को संविधान द्वारा निम्न शक्तियां प्राप्त हैं।
लोकसभा के अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष को निर्वाचित करने तथा पदमुक्त करने का अधिकार केवल लोकसभा को प्रदान किया गया है।
अध्यक्ष या उपाध्यक्ष को संकल्प पारित करते पदमुक्त किया जा सकता है किंतु अब तक ऐसा नहीं हुआ है।
मंत्रिपरिषद संयुक्त रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदाई होती है और लोकसभा मंत्री परिषद पर प्रयाप्त नियंत्रण रखती है।
यदि लोकसभा मंत्रिपरिषद के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित कर दे तो राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद को बर्खास्त कर देता है।
यदि लोकसभा सरकार द्वारा पेश किए गए बजट को नामंजूर कर दे या राष्ट्रपति के अभिभाषण के लिए उसके धन्यवाद प्रस्ताव को अस्वीकृत कर दें तो भी मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना पड़ता है।
वित्त विधेयक लोकसभा में पेश किए जाते हैं यदि राज्यसभा वित्त विधेयक में कोई संशोधन करती है तो लोकसभा के विवेक पर निर्भर कि वह इस संशोधन को स्वीकार करें या अस्वीकार।
लोकसभा अनुच्छेद 352 के तहत राष्ट्रपति द्वारा जारी राष्ट्रीय आपात की उदघोषणा को नामंजूर कर सकती है यह नामंजूरी लोकसभा के विशेष अधिवेशन में दी जा सकती है।
यदि लोकसभा का कोई सदस्य अपने कार्यों से सदन की गरिमा भंग करता है या अपने विशेषाधिकारो का उल्लंघन करता है तब लोकसभा उस सदस्य को निष्कासित कर सकती है।
लोकसभा को निष्कासन रद्द करने का अधिकार प्राप्त है उदाहरण के लिए सन 1980 में लोकसभा में श्रीमती इंदिरा गांधी जी ने 1978 में निष्कासित कर दिया गया था का निष्कासन रद्द कर दिया।
जो व्यक्ति लोकसभा के विशेष अधिकारों का उल्लंघन करता है उसे लोकसभा द्वारा जेल भेजा जा सकता है उदाहरण के लिए सन 1977 में इंद्रदेव सिंह को लोकसभा में परिचय फेंकने के कारण जेल भेजा गया था।
लोकसभा को सदन की कार्यवाही संचालित करने के लिए प्रक्रिया संबंधी नियम बनाने की शक्ति प्राप्त है साथ ही युवा इन नियमों को निम्नलिखित भी कर सकता है