स्थापित किया शैली 10 वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में मिश्रित शैली के रूप में बिंदु तथा कृष्णा नदी के मध्य विकसित हुई । कन्नड़ प्रदेश के अंतिम चालुक्य शासकों ने इस शैली का प्रयोग करके अनेक मंदिरों का निर्माण करवाया। इस शैली में नागर तथा द्रविड़ दोनों शैलियो का अनुकरण किया जाता है । बेसर स्थापत्य शैली की विशेषता होती है कि इसमें मुख्य नियोजन तथा प्रारूप द्रविड़ होता है परंतु विद्यमान अलंकरण निरूपण तथा नवीन प्रतीकों की संरचना आदि नागर शैली में से प्रभावित होती है।
बेसर शैली के स्थापत्य में द्रविड़ स्थापत्य की ही भांति मान मंडप तथा किसी-किसी उदाहरणों में एक अतिरिक्त खुले मंडप का नियोजन होता है । विमान पर एक के ऊपर दूसरे अलंकृत ताखों का नियोजन नागर शैली का प्रभाव दर्शाता है इस शैली में नागर कला का दूसरा लक्षण प्रदक्षिणा पथ का छत विहीन होना है ।मंदिरों की बाहरी दीवारों पर रथों का नियोजन भी नागर शैली का परिचायक है जबकि इसके महल में निर्मित भीतरी स्तंभ द्रविड़ शैली से अनुप्रेरित है। इस शैली के प्रमुख मंदिर हैं-
1. कका नूर का कालेश्वर मंदिर।
2. धरवार जिले में लकड़ी जैन मंदिर एवं मुक्तेश्वर सिद्धेश्वर तथा सिद्ध रामेश्वर मंदिर।
3. इतनी का महादेव मंदिर।
4. ककुंडी का काशी विश्वेश्वर मंदिर।
5. हेलेविड का होयलेश्वर मंदिर।