सहसंयोजक आबंध के संबध मे आधुनिक विचार

सहसंयोजक आबंध के दो आधुनिक सिद्धांत है।           (1) संयोजकता आबंध् सिद्धांत  (2) आण्विक कक्षक सिद्धांत।                                                           सयोजकता आबंध सिद्धांत  (valence bond theory)।                                                          परमाणु संरचना के संबंध में आधुनिक विचारों के अनुसार , परमाणुओ में इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारो ओर त्रिविम आकार में विभिन्न आकार ,आकृतियो और अभिविन्यासो के परमाणु आर्बिटलो में वितरित रहते है तथा एक आर्बिटल में अधिकतर विपरित स्पिन के दो इलेक्ट्रॉन रह सकते है l एक आर्बिटल में  उपस्थित दो इलेक्ट्रॉन विपरित दिशाओं में चक्रण करते है l।           सहसायोजक बॉन्ड के बनाने में केवल वे परमाणु आर्बिटल भाग लेते है जिनमे केवल एक एक इलेक्ट्रॉन उपस्थित होते है l दो संयोजी परमाणुओ के आधे भरे हुए परमाणु आर्बिटलो का अतिव्यापन होने पर विपरित स्पिन के इलेक्ट्रॉन युगमित हो जाते है और इलेक्ट्रॉन युग्म संयोजी परमाणुओ के नाभिको के मध्य बंध बना देते है l ये बंध सहसंयोजक बंध कहलाते है                 आण्विक कक्षक सिद्धांत (molecular orbital theory of covalent bonding)।                     आण्विक कक्षक सिद्धांत सहसायोजक बंध का एक आधुनिक सिद्धांत है l
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