केंद्र सरकार ने वस्तुओं एवं सेवाओं का देशव्यापी तैयार करने और केंद्र तथा राज्य स्तर पर मौजूदा अप्रत्यक्ष करों की जगह नई वस्तु एवं सेवा कर प्रणाली लागू करने के लिए 22 मार्च 2011 को 115 वां संविधान संशोधन विधेयक पेश किया गया। इसमें केंद्र और राज्यों को वस्तुओं एवं सेवाओं पर कर लगाने का एक जैसा अधिकार दिए जाने का प्रावधान है। अब विधेयक को समीक्षा के लिए संसद की स्थाई समिति के पास भेजा जा सकता है। प्रस्तावित जीएसटी केंद्र स्तर पर उत्पाद शुल्क और सेवा कर तथा राज्य स्तर पर बैठ के अलावा अन्य स्थानीय शुल्कों का स्थान लेगा। विधेयक के उद्देश्य एवं कारणों में बताया गया है जीएसटी एक अप्रत्यक्ष करों का स्थान लेगा जिसे फिलहाल केंद्र सरकार और राज्य सरकार लगाते हैं । साथ ही इसका उद्देश्य करो के का स्कैनिंग प्रभाव को समाप्त करना तथा वस्तुओं एवं सेवाओं के लिए संयुक्त मंच के रूप में कार्य करने वाले विधेयक में एक सर्व शक्तिशाली जीएसटी परिषद के गठन का प्रावधान है जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री करेंगे। परिषद के पास वस्तुओं एवं सेवाओं के लिए कर दो के निर्धारण छूट तथा सीमा के बारे में सभी तरह की सिफारिश करने का अधिकार होगा। इसका गठन राष्ट्रपति के द्वारा होगा। अध्यक्ष के अलावा इसके सदस्यों में केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री राज्यों के वित्त कर विभाग के मंत्री का राज्य द्वारा नामांकित कोई मंत्री शामिल होंगे। जीएसटी संबंधित विवादों के निपटारे के लिए एक जीएसटी विवाद समाधान प्राधिकरण के गठन का भी प्रस्ताव है। इसके अध्यक्ष उच्चतम न्यायालय या किसी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश होंगे जबकि दो अन्य सदस्य कानून अर्थशास्त्र या जन मामलों के विशेषज्ञ होंगे। इनके नाम की सिफारिश जीएसटी परिषद करेगी। जीएसटी के मौसम को राज्य सरकार द्वारा तीन बार खारिज किया जा चुका है इसी वजह से जीएसटी को अप्रैल 2010 से लागू करने का प्रस्ताव किया है।