शाहजहाँ (१६२७-१६६६)

शाहजहाँ पाँचवें मुग़ल सहंशाह थे । शाह जहाँ अपनी न्यायप्रियता और वैभवविलास के कारण अपने काल में बड़े लोकप्रिय रहे। किन्तु इतिहास में उनका नाम केवल इस कारण नहीं लिया जाता। शाहजहाँ का नाम एक ऐसे आशिक के तौर पर लिया जाता है जिसने अपनी बेग़म मुमताज़ बेगम के लिये विश्व की सबसे ख़ूबसूरत इमारत ताज महल बनाने का यत्न किया।

सम्राट जहाँगीर के मौत के बाद, छोटी उम्र में ही उन्हें मुगल सिंहासन के उत्तराधिकारी के रूप में चुन लिया गया था। 1627 में अपने पिता की मृत्यु होने के बाद वह गद्दी पर बैठे। उनके शासनकाल को मुग़ल शासन का स्वर्ण युग और भारतीय सभ्यता का सबसे समृद्ध काल बुलाया गया है।

शाहजहाँ को मुगल शासकों में से सबसे प्रमुख शासक माना जाता है। वह एक बहादुर, बुद्धिमान और दूरदर्शी शासक थे। वह जहाँगीर के बेटे और अकबर के पोते थे। उनके चार पुत्र दाराशिकोह, शाहशुजा, मुरादबख्श और औरंगजेब थे और तीन बेटियाँ जहाँनारा, रोशनारा और गौहरारा थीं। शाहजहाँ और उनके पिता जहाँगीर के बीच संबंध बहुत ही तनाव पूर्ण थे, इसका मुख्य कारण उनके पिता का अपनी बेहद बुद्धिमान और चतुर पत्नी नूरजहाँ पर अत्यधिक निर्भर होना था। सन् 1627 में, जब जहाँगीर की लाहौर में मृत्यु हो गई, रानी नूरजहाँ द्वारा किए गए षड़यन्त्रों के बावजूद भी प्रजा की माँग पर शाहजहाँ को ही सिंहासन पर बिठाया गया ।

अक्सर, शाहजहाँ के तीस साल के शासनकाल (1628-1658) को ही मुगल वंश के स्वर्ण कालीन युग के रूप में जाना जाता है। अकबर ने जिस क्षेत्र की स्थापना की, उसे शाहजहाँ ने विस्तारित, संरक्षित और कुशलता से शासित किया। उनके समय में शासन अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण और समृद्ध था, लड़ाईयाँ कम होती थीं और राजकोष भरा हुआ था तथा वहाँ के लोग खुश और संतुष्ट रहते थे।

शाहजहाँ ,कला और वास्तुकला के गूढ़ प्रेमी थे। उनके शासनकाल के दौरान बनाई गई वास्तुशिल्प संरचनाएं, हिंदू और इस्लामी परंपराओं को परिभाषित करती हैं। उनकी सबसे उत्कृष्ट स्थापत्य संरचना ताजमहल है, जो दुनिया के सात आश्चर्यों (अजुबे) में से एक है। यह शानदार मकबरा उन्होंने अपनी पत्नी मुमताज महल की याद में बनाया था। उनके संरक्षण में कई महलों और मस्जिदों का निर्माण हुआ। उनके शासनकाल को “संगमरमर शासनकाल” के रूप में जाना जाता है क्योंकि शाहजहाँबाद के महलों की तरह ही उनकी अधिकांश वस्तुशिल्पें जैसे- मोती मस्जिद और ताजमहल आदि सभी का निर्माण भी संगमरमर (मार्बल) से ही हुआ है। सन् 1639 में, उन्होंने अपनी राजधानी को आगरा से दिल्ली स्थानांतरित कर लिया और इस नई राजधानी को शाहजहाँबाद का नाम दिया। शानदार लालकिला को निर्मित करवाने में उन्हें लगभग दस साल लग गए थे। इन शहरों में बाजार, मस्जिद, उद्यान, महल आदि प्रमुख रूप से शामिल हैं।

शाहजहाँ के चारों पुत्र आपस में एक भयंकर प्रतिद्वंद्वी की तरह थे जो शाहजहाँ के बाद सिंहासन पाने के लिए बेताब थे। हालांकि अपने सिंहासन के दावेदार के रूप में वह अपने सबसे बड़े बेटे दाराशिकोह का ही समर्थन करते थे। उनके जीवन का अंतिम समय बहुत दुखद था क्योंकि उनके बेटे औरंगजेब ने उनको आगरा के किले में कैद कर दिया था और मृत्यु तक कैद ही रखा।

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