हड़प्पा सभ्यता का उद्भव

उद्भव के संबंध में विभिन्न विद्वानों ने अपने-अपने जो राय व्यक्त किए हैंl उसे 2 सिद्धांतों के अंतर्गत बांटा जा सकता है वैदेशिक उद्भव का सिद्धांत तथा दूसरा स्थानीय उद्भव का सिद्धांत है

प्रदेशिक उद्भव के सिद्धांत के अंतर्गत यह माना जाता हैl कि हड़प्पा सभ्यता के जनक दक्षिणी मेसोपोटामिया के सुमेरिया ही लोग थेl और इस मत के समर्थक विद्वानों में d. h. गार्डनर ,सर जान मार्शल, व्हीलर, राखालदास बनर्जी, व दयाराम साहनी आदि का नाम उल्लेखनीय है lपुष्टि के तौर पर इन लोगों ने कहा कि हड़प्पा सभ्यता के उद्भव में कोई भी संक्रमण काल नहीं दिखता है lइसके अलावा दोनों सभ्यताओं में कई समानताएं भी थी जैसे दोनों सभ्यताएं किसी न किसी नदी के किनारे बसी थीl हड़प्पा सिंधु या उसकी सहायक नदियों के आसपास जबकि मेसोपोटामिया दजला और फरात नदियों के आसपास बसी थीl दोनों की अर्थव्यवस्था का आधार कृषि था दोनों सभ्यता गिरी थीl और दोनों में पक्की ईंटों का प्रयोग होता थाl

परंतु सूक्ष्म अवलोकन करने पर पता चलता है। कि इसमें समानता की तुलना में असमानता के तत्व कहीं ज्यादा प्रबल थे। जैसे पक्की ईंटों का दोनों प्रयोग करते थे परंतु जितने बड़े पैमाने पर पक्की ईंटों का प्रयोग हड़प्पा वासियों ने किया उतना अन्यत्र दुर्बल दुर्लभ है ।

स्थानीय उद्भव के स्थान सिद्धांत के समर्थक विद्वान में आयोजित दंपति डी पी अग्रवाल, रफीक मुगलसर,रंगनाथ राव आदि प्रमुख हैं ।इनका मानना है कि हड़प्पा सभ्यता का उद्भव स्थानीय नवपाषाण कालीन बस्तियों में हुआ था। यह बात सत्य है कि इस सभ्यता के स्थानीय उद्भव का सिद्धांत हमारे सामान्य बुद्धि को ज्यादा तुस्ट करते हैं। परंतु इसके इस स्थानीय उद्भव की प्रक्रिया को रेखांकित करना भी एक मुश्किल भरा कार्य माना जाता है।

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