हड़प्पा सभ्यता की जानकारी की पृष्ठभूमि

हड़प्पा नामक पुरास्थल के बारे में सर्वप्रथम जानकारी 1826 ईसवी में चार्ल्स मैसन ने दी थी ।परंतु उस समय किसी का ध्यान इस ओर नहीं गया इसके बाद 1856 ईस्वी में कराची से लाहौर के बीच रेलवे लाइन के निर्माण के क्रम में एक ब्रिटिश अधिकारी जान विलियम ब्रंटन को कुछ वीडियो अथवा गुणों की जरूरत महसूस है। और उसे प्राप्त करने के लिए उसने जो प्रयास किया उससे भी हड़प्पा नामक पुरास्थल के बारे में जानकारी मिली। भारतीय पुरातत्व के पिता के उपनाम से प्रसिद्ध अलेक्जेंडर कनिंघम ने भी इस क्षेत्र में 1853 ईसवी तथा 1873 ईसवी में उत्खनन के कुछ कार्य किए ।यहां भी उन्होंने कई बार यात्रा की और के चित्र अक्षर एक संघीय मुहर पर 1875 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण में एक रिपोर्ट प्रकाशित की। 1930 के दशक के पूर्व यह सारे प्रयास इस सभ्यता को पूर्णरूपेण प्रकाश में नहीं ला पाए।

1921 विश्व में प्रसिद्ध पुरातत्व विद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के महानिदेशक सर जॉन मार्शल के नेतृत्व में रायबहादुर श्री दयाराम साहनी के द्वारा पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के मोंटगोमरी वर्तमान में साहिवाल जिले में रावी नदी के तट पर स्थित हड़प्पा नामक पुरास्थल की विधिवत खुदाई की गई। अगले वर्ष सन 1922 ईस्वी में राखालदास बनर्जी ने सिंध प्रांत के लरकाना जिले में सिंधु नदी के दाहिने तट पर स्थित मोहनजोदड़ो का उत्खनन किया ।और तब जाकर यह सभ्यता लोगों के सम्मुख पूर्णरूपेण प्रकाश में आ सकी।

हड़प्पा सभ्यता से संबंधित पुरातत्व भारतीय उपमहाद्वीप के भारत पाकिस्तान और अफगानिस्तान जैसे देशों से प्राप्त हुए हैं।

Posted on by