जेट प्रवाह वा ऊपरी वायु परिसंचरण

वायुमंडल के क्षोभमंडल पर धरातल से लगभग 3 किलोमीटर ऊपर बिल्कुल भिन्न प्रकार का वायु संचरण होता है। ऊपरी वायु संचरण के निर्माण में पृथ्वी के धरातल के निकट वायुमंडलीय दाब की भिन्नता ों की कोई भूमिका  नहीं होती। 6 से 12 किलोमीटर की ऊंचाई पर समस्त मध्य एवं पश्चिमी एशिया पश्चिम से पूर्व बहने वाली पछुआ पवनों के प्रभाव अधीन होता है।

यह पवन तिब्बत के पठार के समांतर हिमालय के उत्तर में एशिया महाद्वीप पर चली हैं। इन्हें जेट प्रवाह कहा जाता है ।तिब्बत उच्च भूमि जेेट प्रभावों के मार्ग में अवरोधक काम करती हैं। जिसके परिणाम स्वरुप जेट प्रवाह दो भागों में बढ़ जाता है ।पहला तिब्बत के पठार की उत्तर की शाखा, 2,हिमालय के दक्षिण में पूर्व की शाखा।

दक्षिणी शाखा की औसत स्थित फरवरी में लगभग 20 डिग्री से 25 डिग्री उत्तरी अक्षांश रेखा के ऊपर होती है। तथा इसका दाब स्तर 200 से 300 मिली बार होता है ।ऐसा माना जाता है कि जेट प्रवाह की यही दक्षिणी शाखा भारत में जाड़ें के मौसम में महत्वपूर्ण प्रभाव डालती है।

पश्चिमी चक्रवाती विक्षोभ तथा उष्णकटिबंधीय चक्रवात पश्चिमी विक्षोभ जो भारतीय उपमहाद्वीप में जाड़े के मौसम में पश्चिम तथा उत्तर पश्चिम में प्रवेश करते हैं ।भूमध्य सागर पर उत्पन्न होते हैं। भारत में इनका प्रवेश पश्चिमी जेट प्रभाव द्वारा होता है ।शीतकाल में रात्रि में तापमान में वृद्धि इन विचारों के आने का पूर्व संकेत माना जाता है। उष्णकटिबंधीय चक्रवात बंगाल की खाड़ी तथा हिंद महासागर में उत्पन्न होते हैं इन उष्णकटिबंधीय चक्रवातों में तेज गति की हवाएं चलती हैं और भारी बारिश होती है। यह चक्रवात तमिलनाडु आंध्र प्रदेश और उड़ीसा के तटीय भागों पर टकराते हैं मूसलाधार वर्षा और पवनों की तीव्र गति के कारण  ऐसे अधिकतर चक्रवात अत्यधिक विनाशकारी होते हैं।

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