रज़िया सुल्तान का शासनकाल

इल्तुतमिश के सबसे बड़े पुत्र नासिरुद्दीन मुहम्मद की 1229 ई. की अप्रैल में मृत्यु हो गयी। वह अपने पिता के प्रतिनिधि के रूप में बंगाल पर शासन कर रहा था। सुल्तान के शेष जीवित पुत्र शासन कार्य के योग्य नहीं थे। अत: इल्तुतमिश की  पुत्री रजिया को उत्तराधिकारी मनोनीत किया गया । परन्तु उसके दरबार के सरदार एक स्त्री के समक्ष नतमस्तक होना अपने अहंकार के विरुद्ध समझते थे। उन लोगों ने मृतक सुल्तान की इच्छाओं का उल्लंघन कर, उसके सबसे बड़े जीवित पुत्र रुक्नुद्दीन फ़िरोज को, जो अपने पिता के जीवन काल में बदायूं तथा कुछ वर्ष बाद लाहौर का शासक रह चुका था, सिंहासन पर बैठा दिया। रुक्नुद्दीन शासन के बिलकुल अयोग्य था। वह नीच रुचि का था, राजकाज की उपेक्षा करता था और राज्य के धन का अपव्यय करता था। उसकी माँ शाह तुर्खान के, जो एक निम्न उद्भव की महत्त्वकांक्षापूर्ण महिला थी, कामों से बातें बिगड़ती ही जा रही थीं। उसने सारी शक्ति को अपने अधिकार में कर लिया,जबकि उसका पुत्र भोग-विलास में डूबा रहता था। सारे राज्य में गड़बड़ी फैल गयी। बदायूँ, मुलतान, हाँसी, लाहौर, अवध एवं बगाल में केन्द्रीय सरकार के अधिकार का तिरस्कार होने लगा। दिल्ली के सरदारों ने, जो राजमाता के अनावश्यक प्रभाव के कारण असन्तोष से उबल रहे थे, उसे बन्दी बना लिया तथा रज़िया को दिल्ली के सिंहासन पर बैठा दिया। रुक्नुद्दीन फिरोज को, जिसने लोखरी में शरण ली थी, कारावास में डाल दिया गया, जहाँ 1236 ई. में 9 नवम्बर को उसके जीवन का अन्त हो गया। परन्तु रज़िया में शासकोचित गुणों का अभाव नहीं था। उसने चतुराई एवं उच्चतर कूटनीति से शीघ्र ही अपने शत्रुओं को परास्त कर दिया। हिन्दुस्तान (उत्तरी भारत) एवं पंजाब पर उसका अधिकार स्थापित हो गया तथा बंगाल एवं सिन्ध के सुदूरवर्ती प्रान्तों के शासकों ने भी उसका अधिपत्य स्वीकार कर लिया।

अपने शासनकाल में रजिया ने अपने पुरे राज्य में कानून की व्यवस्था को उचित ढंग से लागू करवाया | उसने व्यापार को बढ़ाने के लिए इमारतो के निर्माण करवाए , सड़के बनवाई | उसने अपने राज्य में शिक्षा व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए कई विद्यालयों , संस्थानों , खोज संस्थानों और राजकीय पुस्तकालयों का निर्माण करवाया | उसने सभी संस्थानों में मुस्लिम शिक्षा के साथ साथ हिन्दू शिक्षा का भी समन्वय करवाया | उसने कला और संस्कृति को बढ़ाने के लिए कवियों ,कलाकारों और संगीतकारो को भी प्रोत्साहित किया था

भटिंडा के गर्वनर मालिक इख्तिअर अल्तुनिया रजिया के इस रिश्ते से काफी नाराज थे क्योंकि अल्तुनिया और रजिया दोनों बचपन के अच्छे मित्र थे | जब अल्तुनिया बड़ा हुआ तो उसको रजिया से एकतरफा प्यार हो गया था और रजिया को पाने के लिए वो किसी भी हद तक जा सकता था | अपने प्यार को पाने के लिए उसने रजिया के प्रेमी याकूत की हत्या करवा दी और रजिया को जेल में डाल दिया | जब जेल में रजिया विद्रोह से निकलने का प्रयास कर रही थी उस दौरान कुछ तुर्कीयो ने , जो पहले ही रजिया के विरोधी थी , इस अवसर का फायदा उठाते हुए दिल्ली पर आक्रमण कर उसे गद्दी से हटवा दिया | अब रजिया के भाई बेहराम को सुल्तान घोषित कर दिया गया | अपने राज्य को बचाने के लिए रजिया ने धैर्य से काम लेते हुए भटिंडा के गर्वनर अल्तुनिया से विवाह करने का निश्चय कर लिया और अपने पति के साथ दिल्ली की तरफ बढ़ने लगी | 13 अक्टूबर 1240 को बेहराम ने रजिया सुल्तान को हरा दिया और अगले ही दिन रजिया सुल्तान और उसके पति अल्तुमियान की हत्या कर दी |

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