भारत में मुगल राजवंश महानतम शासकों में से एक था। मुगल शासकों ने हज़ारों लाखों लोगों पर शासन किया।अकबर के स्थान पर उसके बेटे सलीम ने तख्तोताज़ को संभाला, जिसने जहांगीर की उपाधि पाई, जिसका अर्थ होता है दुनिया का विजेता। उसने मेहर उन निसा से निकाह किया, जिसे उसने नूरजहां (दुनिया की रोशनी) का खिताब दिया। वह उसे बेताहाशा प्रेम करता था और उसने प्रशासन की पूरी बागडोर नूरजहां को सौंप दी। उसने कांगड़ा और किश्वर के अतिरिक्त अपने राज्य का विस्तार किया तथा मुगल साम्राज्य में बंगाल को भी शामिल कर दिया। जहांगीर के अंदर अपने पिता अकबर जैसी राजनैतिक उद्यमशीलता की कमी थी। किन्तु वह एक ईमानदार और सहनशील शासक था। उसने समाज में सुधार करने का प्रयास किया और वह हिन्दुओं, ईसाइयों तथा ज्यूस के प्रति उदार था। जबकि सिक्खों के साथ उसके संबंध तनावपूर्ण थे और दस सिक्ख गुरूओं में से पांचवें गुरू अर्जुन देव को जहांगीर के आदेश पर मौत के घाट उतार दिया गया था, जिन पर जहांगीर के बगावती बेटे खुसरू की सहायता करने का अरोप था। जहांगीर के शासन काल में कला, साहित्य और वास्तुकला फली फूली और श्री नगर में बनाया गया मुगल गार्डन उसकी कलात्मक अभिरुचि का एक स्थायी प्रमाण है ।मुगल चित्रकला जहांगीर के काल में अपनी चरम सीमा पर थी। वह स्वयं भी उत्तम चित्रकार और कला का पारखी था।इस समय के कलाकारों ने चटख रंग जैसे मोर के गले सा नीला और लाल रंग का प्रयोग करना और चित्रों को त्रि-आयामी प्रभाव देना प्रारंभ कर दिया था।जहांगीर के शासन काल के मशहूर चित्रकार थे मंसूर, बिशनदास और मनोहर। जहांगीर ने अपनी आत्मकथा में लिखा कि कोई भी चित्र चाहे वह किसी मृतक का हो या जीवित व्यक्ति द्वारा बनाया हो मैं देखते ही तुरंत बता सकता हूं कि ये किसकी कृति है ।इतमाद-उद-दौला का मकबरा 1626 ई में नूरजहां बेगम ने बनवाया था मुगलकालीन वास्तुकला के अंतर्गत यह पहली आसी इमारत थी जो सफेद संगमरमर से बनी थी ।जहांगीर के शासनकाल में कैप्टन हॉकिंस, सर टॉमस रो एडवर्ड टेरी जैसे यूरोपीय यात्री आए थे।
जहांगीर के सबसे बड़े बेटे खुसरो ने 1606 ई में अपने पिता के विरूद्ध विद्रोह कर दिया था ।खुसरो और जहांगीर की सेना के बीच युद्ध जलांधर के पास हुआ और खुसरो को जेल में डाल दिया गया। खुसरो की सहायता करने के लिए जहांगीर ने सिक्खों के 5वें गुरु अर्जुन देव को फांसी दिलवा दी ।जहाँगीर की मृत्यु १६२७ मैं हुई ।जहांगीर के बाद उसके द्वितीय पुत्र खुर्रम ने 1628 में तख्त संभाला। खुर्रम ने शाहजहां का नाम ग्रह किया जिसका अर्थ होता है दुनिया का राजा। उसने उत्तर दिशा में कंधार तक अपना राज्य विस्तारित किया और दक्षिण भारत का अधिकांश हिस्सा जीत लिया।