भाई दूज का त्यौहार बहुत ही प्रचलित त्यौहार है या पूरे भारतवर्ष में मनाया जाता है या दिवाली के तीसरे दिन होता है इस त्यौहार के अवसर में एक बहुत ही प्राचीन कथा प्रचलित है कि एक बूढ़ी मां थी जिसके दो बच्चे थे एक बेटा और एक बेटी थी बेटी की शादी हो गई थी भाई दूज के दिन बेटा अपनी बूढ़ी मां से कहता है मां मैं दीदी से मिलने जा रहा हूं और टीका करवाने जा रहा हूं तभी मां बोलती है तेरी बहन तो बहुत कर लिया है वह तो हर वक्त लड़ती रहती है तो उसके घर जाकर क्या करेगा लेकिन बेटे के आग्रह करने पर बूढ़ी अम्मा उसे जाने के लिए इजाजत दे देती है फिर बेटा वहां से चला जाता है रास्ते में आगे जाकर उसे एक नदी मिलती है नदी बोलती है मैं मैं तेरा काल हूं मैं तुझे डूब आओगे तो भाई कहता है मैं कई साल के बाद अपनी बहन से मिलने जा रहा हूं मुझे वहां से वापस आने दो फिर मुझे तुम डूबा लेना फिर आगे जंगल में जाकर उसे एक शेर मिलता है वह कहता है मैं बहुत भूखा हूं मैं तुझे खा लूंगा तो भाई कहता है देखो मैं कई सालों के बाद अपनी बहन से मिलने जा रहा हूं वहां से लौट आऊंगा तो तुम मुझे खा लेना और थोड़ी दूर आगे जाकर उसे एक साथ मिलता है वह कहता है मैं तुझे डस लूंगा तो भाई कहता है मैं अपनी बहन से मिलने जा रहा हूं वहां से वापस आऊंगा तो तुम मुझे डस लेना फिर भाई अपनी बहन के पास पहुच जाता हैआवज देता है तो अंदर से कोई नहीं बोलता फिर वह मन ही मन सोचता है कि आखिर उसकी बहन उससे रिश्ता क्यों रखेगी लेकिन वहां उसकी बहन जवाब नहीं देती । तभी वह तात बनाती रहती रहती हैं तभी तात बीच में टूट जाता कहते हैं जिसका एकलौता भाई हो उससे नहीं बोलना चाहिए जब तक तात दोबारा नही जू़ड़ नहीं जाता और वह बाहर निकलकर भाई को आवाज देती है भाई पलट कर देखता है और कहता है बहन तू पहले क्यों नहीं बोली तो बहन भाई को सारा किस्सा सुना देती है फिर वह अपने भाई को अंदर ले कर जाती है और फिर अपनी पड़ोसन के पास जाती है और उससे कहती है कि अगर कोई जान से प्यारा आपके घर आए तो आपको क्या करना चाहिए पड़ोसन उसका मजाक उड़ाते हुए है जलते बुझते हुए कहती है कि तेल का चौका करना और घी में चावल पकाना तभी भाई कहता बहन बहुत भूख लगी है खाना बन गया हो तो परोस दे बहन कहती है पता नहीं भाई आज क्या हुआ है ना ही चावल सींच रहे हैं और ना ही चौका सूख रहा है तो भाई कहता है बहन तूने कैसे लगाया है तो बहन कहती है मैं अपने पड़ोस के पास गई थी और उससे पूछा कि जान से प्यारा आये तो उसका स्वागत कैसे करें तो उसने जैसे मुझे बताया है वैसे वैसे किया भाई के तो नहीं वह तेरा मजाक उड़ा रही थी बोली बहन पानी में ही चौका लगा और पानी से ही चावल सोचा फिर खाना तैयार हो जाता है और बहन अपने भाई को परोस देती है ऐसे ही कुछ दिन बीतते हैं फिर वह भाई कहता है अब मुझे जाना होगा बहन उसकी जाने की तैयारी करती है और उसके लिए लड्डू बनाती है और सुबह उठकर गेहूं पीसती है वह आई के लिए अपने भाई के लिए लड्डू बनाती और थोड़ा आधे लड्डू भाई को देख कर थोड़ी बच्चों के लिए रख देती हैअपने बच्चों के लिए रख देती है जब बच्चों को भूख लगती है तो बच्चों से कुछ खाने के लिए मांगते हैं तो वह वही लड्डू दे देती है जब वह देखती है खोलती है डिब्बा तो वह देखती है कि सारे लड्डू हरे हो गए हैं तो तभी वह चक्की हटाकर देखती है तो उसमें एक साथ पर जाता है तभी वह वहां से भागते हुए अपने भाई के पीछे जाती है तभी उसे आगे जाकर पेड़ के नीचे उसका भाई बैठा मिलता है तो उससे वह लड्डू के बारे में पूछती है तो भाई कहता है तुम्हारे लड्डू पेड़ पर टंगे हुए हैं ले लो तो बहन उसे सारा किस्सा बताती है तो भाई उससे कहता है वैसे भी मैं मर जाऊंगा तो बहन से पूछती है तुम ऐसा क्यों कह रहे हो तो भाई उसे सारा किसका बता देता है कि उसके साथ उसके यहां आते हुए क्या-क्या हुआ तभी बहन को प्यास लग जाती है और वह नदी किनारे जाती है वहां पर एक बूढ़ी मां बैठी रहती है जिससे बहन पूछती है आप कौन हैं और यहां क्यों बैठी है तो वह बोलती है कि मैं विधाता हूं और
1 भाई-बहन का किस्सा लिख रही हूं