क़ुतुबुद्दीन ऐबक का विवरण

कुतबुद्दीन ऐबक मध्यकालीन भारत के शासक था, और साथ ही दिल्ली सल्तनत के पहले शासक भी थे और गुलाम वंश के पहले सल्तनत थे।अफगानिस्तान में अपने साम्राज्य का विस्तार कर मुहम्मद घोरी ने खुद को एक मजबूत और शक्तिशाली शासक साबित किया था। उनका ज्यादातर साम्राज्य अफगानिस्तान, पाकिस्तान और उत्तर भारत में फैला हुआ था। और इसीके चलते कुतबुद्दीन ऐबक को भी 1206 में दिल्ली के सुल्तान की पदवी दी गयी थी, उस समय मुहम्मद घोरी की युद्धभूमि पर ही मृत्यु हो गयी थी। उन्होंने घोरी साम्राज्य में प्रशासनिक यंत्रणा को सुधारने के काफी प्रयास किये थे।

कुतुबुद्दीन ऐबक भारत में तुर्कसल्तनत का संस्थापक माना जाता है। उसनेभारत में इस्लामिक साम्प्रदायिक राज्य कीस्थापना की। वास्तव में इसी इस्लामिकसाम्प्रदायिक राज्य की स्थापनार्थ ही पिछलेपांच सौ वर्षों से विभिन्न मुस्लिम आक्रांताभारत पर आक्रमण करते आ रहे थे, जिनकासफलतापूर्वक प्रतिकार भारत के स्वतंत्रताप्रेमी राजाओं और उनकी प्रजा के द्वाराकिया जा रहा था।

कुतुबुद्दीन ऐबक ने जब भारत मेंप्रवेश किया तो उसने भी इसी परंपरा कानिर्वाह किया और भारतीय धर्म का सर्वनाशकर इस्लाम का परचम फहराना अपनाउद्देश्य घोषित किया। अपने इस उद्देश्य कीप्राप्ति में उसे जयचंद बाधा दिखाई दिया, तो उसके नाश के लिए उसने गोरी केआदेशानुसार योजना बनानी आरंभ की।गोरी ने उसकी योजना से सहमत होकर एकसेना जयचंद के नाश के लिए भेजी।कन्नौज का शासक जयचंद उस समयकन्नौज से लेकर वाराणसी तक शासन कररहा था।

ऐबक ने सूफी संत ‘ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी’ के नाम पर दिल्ली में कुतुबमीनार की नींव डाली, जिसे इल्तुतमिश ने पूरा किया। 1210 ई. में घोड़े से गिरकर ऐबक की मृत्यु हो गयी। उसकी मृत्यु के बाद उसका अयोग्य पुत्र आरामशाह सुल्तान बना। किन्तु इल्तुतमिश ने उसे युद्ध में पराजित कर मर डाला और स्वयं सुल्तान बन गया।

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