1916 में कांग्रेस और मुस्लिम लीग में समझौता हो जाने कांग्रेस में एकता स्थापित होने और कांग्रेस में उग्रदल का प्रभुत्व स्थापित हो जाने , भारतीयों द्वारा संयुक्त रूप से होमरूल की माग की जाने और अंतिम रूप में मेसोपोटेमिया आयोग की रिपोर्ट ने ब्रिटिश सरकार को इस बात के लिए विवश कर दिया की उसके द्वारा भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण परिवर्तन किए जाने की घोषणा की जाए l नए भारत मंत्री मि. मांटेग्यू प्रगतिवादी दृष्टिकोण के थे l अतः उन्होंने उपर्युक्त परिस्थितियो को ध्यान में रखते हुए 20 अगस्त , 1917 को घोषणा की l
(1) ब्रिटिश शासन का उद्देश्य भारत में उत्तरदायी शासन की स्थापना करना है l
(2) उत्तरदायी शासन की स्थापना क्रमिक विकास द्वारा ही संभव है
(3) उत्तरदायी शासन की दिशा में प्रगति के प्रत्येक चरण का निर्णय ब्रिटिश सरकार तथा भारत सरकार ही कर सकती है , जिस पर भारतीय जनता की समृद्धि और उन्नति का उत्तरदायित्व है l
(4) ब्रिटिश सरकार द्वारा इस संबंध में निर्णय भारतीय व्यक्तियों द्वारा दिए गए सहयोग और उनके द्वारा दिए गए उत्तरदायित्व के परिचय के आधार पर किया जाएगा l
किंतु इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता की 1917 की घोषणा में भारतीय शासन में विकास के एक नवीन युग का प्रारंभ हुआ l अगस्त 1917 के पूर्व ब्रिटिश शासन द्वारा भारत के संबध में कुछ उदार घोषणाएं तो की गई थी, किंतु यह कभी भी नहीं बताया था कि ब्रिटिश नीति भारत को किस निर्दिष्ट लक्ष्य की ओर ले जा रही थी l यह कमी 1917 की घोषणा ने पूरी कर दी l 1917 में ब्रिटिश सरकार ने स्पष्टतया इस बात की घोषणा की कि वह भारत में भारतीयों का शासन , उत्तरदायी सरकार के सिद्धांतो के आधार पर स्थापित करना चाहती थी l