हड़प्पाकालीन लोगों के धार्मिक जीवन में धर्म की महत्वपूर्ण भूमिका थी। प्राप्त जानकारी के आधार पर हड़प्पा कालीन धार्मिक विश्वासों में परवर्ती हिंदू धर्म की अनेक विशेषताएं शामिल थी। महत्व की दृष्टि से मातृत्देवी की उपासना सर्वाधिक प्रचलित थी। इसकी जानकारी के स्रोत वहां से प्राप्त मुहरों मूर्तियां हैं ।हड़प्पा से प्राप्त आयताकार और लेख युक्त एक मुहर में सिर के बाल खड़ी एक स्त्री के गर्भ से एक पौधे को निकलते हुए दिखलाया गया है इसी प्रकार यहीं से प्राप्त हुए एक मोहर के गर्भ से एक पीपल की दो शाखाओं के बीच स्त्री की आकृति बनी है। तथा पेड़ के नीचे बकरा लिए एक मानव की आकृति है और उसके पीछे भीड़ खड़ी दिखलाई गई है ।यह सारे प्रमाण इस बात की पुष्टि करते हैं की हड़प्पा वासी मातृदेवी की उपासना जननी या उर्वरता या वनस्पति की देवी के रूप में किया करते थे।
मोहनजोदड़ो में मायके नामक एक पूरा विद को एक ऐसी मुहर के साथ शामिल है। जिसमें सिंह वाले एक त्रिमुखी पुरुष को योग की पद्मासन मुद्रा में लगभग नग्न बैठे दिखलाया गया है।।। इसके दाहिनी ओर एक हाथी और एक बाघ, बाई ओर एक भैैसा वह ऐसा सिंहासन के नीचे एक दूसरे की हिरण की आकृति बनी है ।मार्शल ने इसका संबंध ऐतिहासिक काल के शिव के साथ स्थापित किया है। शिव उपासना संबंधित एक अन्य उदाहरण भी मोहनजोदड़ो से प्राप्त होते हैं मोहन जोदड़ो तथा हड़प्पा से विशाल संख्या में में चक्र मिले हैं ।लोथल से भी ऐसे चमकीले पत्थरों के अवशेष प्राप्त हुए हैं प्रत्येक चक्र के मध्य क्षेत्र है जिससे विद्वानों ने योनि का प्रतीक माना है हड़प्पा मोहनजोदड़ो से भी कुछ पत्थरों पर ऐसे ही निर्मित साथ मिलेंगे जिसकी पहचान लेंगे के रूप में की गई है हाल के वर्षों में आर एल स्टाइल को पाकिस्तान के बलूचिस्तान क्षेत्र में स्थित युवा पीढ़ी में कर्मचारियों ने स्पष्ट साक्ष्य में ले आएं। युवा शक्ति के रूप में किया जाता था। यह सारे प्रमाण संबंधी जानकारी देते हैं।