भारत में यहां प्रवेश करने वाली सभी विदेशी जातियों एवं संस्कृतियों को अपने में समाहित कर लिया जिससे इसके विश्वास एवं सामाजिक संरचना का आधार विस्तृत हुआ अधिकांश देशों में इस्लाम ने भी यही तरीका अपनाया परंतु इसका उग्र लोकतंत्र एवं उदार तर्कवाद आ समझौतावादी था।
साथ ही भारत में मुस्लिम समाज ने संपत्ति एवं स्थित पर आधारित एक प्रकार के पद सोपान का विकास किया इसका उदाहरण सामंतवाद था जो इस्लाम की भावना से मेल नहीं खाता है।
इस्लाम में सदा पृथक पुरोहित व्यवस्था का खंडन किया गया है परंतु निर्विवाद रुप से इस प्रकार का विकास भारतीय मुस्लिम समाज में देखने को मिलता है। वैदिक कर्मकांड एवम रीतियों के प्रति रुचि दर्शाते हैं। राजपूत राजाओं के अनेक दरबारी रीत रिवाज मुसलमानों से ग्रहण किए गए दूसरी ओर न्योछावर की प्रथा एक हिंदू दरबारी रिवाज है जिसे मुसलमानों ने अपनाया मुस्लिम धार्मिक नेता एवं बुद्धिजीवी हिंदुओं के वेदांत एवं योग से प्रभावित थे।
हिंदू समाज के साथ संपर्क के चलते मुसलमानों में वर्ग विभेद आया पारस्परिक संपर्क से जातियों एवं उप जातियों का उदय हुआ अपने हिंदू समकक्षों के समान अनेक मुस्लिम वर्ग एक ही शहर में पृथक रहने लगे।
हालांकि हिंदू दर्शन में सदा जीवन की संपूर्णता एवं साक्षरता की प्रवृति पर बल दिया है इसका परिचय हमें इस्लाम एवं हिंदू धर्म के बीच समझौता वादी दृष्टिकोण अपनाए जाने से मिलता है मुसलमानों की ओर से कबीर चिश्ती एवं दारा शिकोह के प्रयास प्रशंसनीय है। जिन्होंने दोनों विश्वासों के बीच आपसी समझ एवं एकता कायम करने का प्रयास किया।