भारतीय संस्कृति पर इस्लाम का प्रभाव

आरंभिक आक्रमणकारी जनजातियों की तुलना में इस्लाम की संस्कृत विशिष्ट थी। इस्लाम संस्कृत का प्रतिनिधित्व बगदाद मिश्र एवं कार्ड ओवर के मुस्लिम साम्राज्य करते थे भारत में इस संस्कृत के वाहक दुर्ग एवं अफगान शायद ही इस्लामी संस्कृत का प्रतिनिधित्व करते थे इस्लाम एवं भारतीय परंपराओं के बीच आदान-प्रदान पारस्परिक था एवं यह विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से हुआ। भक्ति आंदोलन का एक दिशा में विशेष योगदान रहा है इसकी जड़े प्रारंभिक भागवत वाद एवं वैष्णव धर्म में दिखती हैं।

हिंदू दर्शन पर इस्लामी प्रभाव को शंकराचार्य के दर्शन में देखा जा सकता है जिसमें उन्होंने बहुलवाद का खंडन कर एकेश्वरवाद पर बल दिया उन्होंने अपने विचारों को केवल भारतीय दर्शन का रूप बताया तथा अद्वैत की स्थापना की जिसकी समानांतर ता इस्लाम में है।

इस्लाम ने कई शताब्दियों के अंतराल के पश्चात भारत का द्वार पश्चिम के लिए खोला इस्लाम ने पूरे उत्तरी भारत में आंतरिक शांति एवं प्रशासनिक एकरूपता कायम की जिससे भारतीय दृष्टिकोण की एकता को प्रोत्साहन मिला पहनावा खानपान प्रथम तथा विश्वासों जैसी सामाजिक पशुओं की एकरूपता के द्वारा भी इस्लाम ने उपरोक्त पहलू पर बल दिया गया।

एक प्रकार की भारतीय इस्लामी वास्तुकला का उदय हुआ इस प्रकार की उपलब्धियां चित्रकला बुनाई धात विज्ञान एवं बागवानी में भी प्राप्त की गई। संभवतासंभवता सर्वाधिक महत्वपूर्ण विकास एक संयुक्त भाषा उर्दू का उदय हुआ जिसने अपने विषय सामग्री प्राचीन भारतीय स्रोतों एवं नए आगंतुकों दोनों से प्राप्त की।

एक धर्म के रूप में इस्लाम के भारत में आगमन कब मुख्य सामाजिक परिणाम समाज का क्षेत्रीय विभाजन था। 13 वीं सदी के पूर्व तक हिंदू समाज ऊर्ध्वाधर रूप से बटा था।

16वीं सदी के अंत तक विभिन्न संस्कृतियों के बीच मेल जोल की प्रक्रिया स्थापित हो गई थी सर्वोच्च स्थान पर कुलीन वर्ग के व्यवहार जीवन शैली एवं सामान्य दृष्टिकोण में एकरूपता स्थापित हो गई थी इसमें उनके विश्वासों में अंतर का प्रभाव निबंध था आम जनता ने भी एक पारस्परिक सहिष्णुता का विकास कर लिया जिससे उन्हें सर्वनिष्ठ समस्याओं का सामना करने एवं खुशियों में भागीदारी संभव हुआ।

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