मौर्य वंश का ही नहीं बल्कि पूरे प्राचीन भारतीय इतिहास का एक महान शासक अशोक था। वह बिंदुसार का पुत्र था अशोक की मात्रा सुभद्रांगी थी। जो चंपा राजवंश के एक ब्राह्मण की कन्या थी। उसकी प्रिय उपाधि प्रियदर्शी की थी। उसने युवराज काल में सम्राट अशोक क्रमशः तक्षशिला उज्जैनी का गवर्नर रह चुका था। दीपवंश महावंश के अनुसार उसके 100 भाई थे। जिसमें उसने 99 भाइयों की हत्या करवाई शासक बना था। दीपवंश में तिस्स को अशोक का छोटा भाई बतलाया गया है ।उसकी कई पत्नियां थी जिसमें से कुछ प्रसिद्ध हैं संघमित्रा, कारुवाकी, पद्मावती, देवी, इसमें से देवी विदिशा के एक व्यापारी की पुत्री थी। अशोक के दो संतान जालौक, चारुमती के ,माता के संबंध में समकालीन साहित्य कोई स्पष्ट जानकारी नहीं देता है।
अशोक ने अपने शासन के 8 वें वर्ष अर्थात 261 ईसा पूर्व में कलिंग का युद्ध किया था। यह युद्ध अशोक ने क्यों किया और उस समय वहां का शासक कौन था इस संबंध में अशोक का अभिलेख मौन है ।परंतु कलिंग के शासक खारवेल का हाथीगुंफा अभिलेख के अनुसार उस समय कलिंग का शासक नंदराज था। कलिंग युद्ध की विभीषिका को देखकर अशोक का मन द्रवित हो उठा और उसने इस युद्ध के लगभग 2 वर्ष के पश्चात बौद्ध धर्म को अपना लिया ।कल्हण की राज तरंगिणी के अनुसार बौद्ध धर्म को अपनाने के पूर्व अशोक शैव धर्म का उपासक था। अशोक अपने चचेरे भाई सुमन और सुसीम के पुत्र ने न्या्यग्रोध के प्रवचन को सुनकर बौद्ध धर्म की ओर आकर्षित हुआ। परंतु उसे बौद्ध धर्म में दीक्षित करने का श्रेय प्रसिद्ध बौद्ध विद्वान उपगुप्त को जाता है।