केंद्रीय हिंदी निदेशालय ने अपनी वेबसाइट पर हिंदी का उद्भव शीर्षक के अंतर्गत खड़ी बोली गद्य की पहली पुस्तक 1623 ईसा में जटमल कृत गोरा बादल की कथा का उल्लेख किया है केंद्रीय हिंदी निदेशालय के अनुसार आधुनिक प्रथम गद्य कारों में सदल मिश्र एवं लल्लू लाल दोनों शामिल हैं जो फोर्ट विलियम कॉलेज कोलकाता में एक साथ गए वहां सदल मिश्र ने 1803 इसमें नासिकेतोपाख्यान की रचना की तथा 1805 लल्लू लाल प्रणीत प्रेमसागर श्रीमद्भागवत पुराण के दशम स्कंध का खड़ी बोली गद्य रूपांतर का प्रकाशन हुआ आधुनिक गद्य कारों में अधिकारों में नासिका पत्थान खड़ी बोली की पहली रचना है ।