अग्नि मनुष्य एवं देवता के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाती थीं।
सरस्वती नदी सबसे महत्वपूर्ण नदी मानी गयी हैं। जबकि सिन्धु नदी का सबसे अधिक बार उल्लेख मिलता है।
ऋग्वेद में गंगा नदी का एक बार तथा जमुना का तीन बार उल्लेख मिलता है।
सोम-वनस्पति देवता
पूषन-पशुओ के देवता
मरूत-आँधी तूफान के देवता
वरूण-ऋत या नैतिक व्यवस्था के देवता थे।
उत्तरवैदिक काल मंे इन्द्र के स्थान पर प्रजापति सर्वाधिक प्रिय देवता हो गये।
उत्तरवैदिक काल में राजाओ के राज्याभिषेक के समय राजसूय यज्ञ का अनुष्ठान किया जाता था।
उत्तरवैदिक काल मे वर्ण व्यवसाय के आधार पर निर्धारित होने लगे थे।
उत्तरवैदिक मे निष्क और शतमान मुद्रा की इकाइयाँ थी।
सांख्य दर्शन सबसे प्राचीन दर्शन है।
”सत्यमेव जयते“ मुण्डकोपनिषद् से लिया गया है।
गायत्री मंत्र ऋग्वेद से लिया गया है।
गोत्र नामक संस्था का जन्म उत्तर वैदिक काल मे हुआ था।
उपनिषद की संख्या-108
पुराणांे की संख्या-18
वेदांग की संख्या-6 (शिक्षा, कल्प, ज्योतिष, छन्द, निरूक्त, व्याकरण)
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