इसमें जैन धर्म दो भागों में विभक्त हो गयी ।
1. श्वेताम्बर-जो सफेद वस्त्र धारण करते थे के नाम से जाने गये।
2. दिगम्बर-जो नग्न रहते थे और कठिन जीवन व्यतीत करते थे
दूसरी जैन संगीत 512 ई0 में वल्लभी (गुजरात) नामक स्थान पर देवऋद्धि क्षमाश्रवण की अध्यक्षता मे हुयी थी।
जैन धर्म के त्रिरत्न हैं -
1. सम्यक् दर्शन
2. सम्यक् ज्ञान
3. सम्यक् आचरण
महावरी ने पांच महाव्रतों का पालन अनिवार्य बताया-अहिंसा, सत्यवचन, अस्तेय, अपरिग्रह एवं ब्रम्ह्चर्य।
महावीर ने चार महाव्रतों में से पाँचवा ब्रम्ह्चर्य जोड़ा था।
जैनधर्म ईश्वर को नही मानता है।
जैनधर्म आत्मा की सत्ता को स्वीकार करता है।
महावीर पुर्नजन्म एवं कर्मवाद में विश्वास करते थे।
जैनधर्म स्यादवाद या अनेकान्तवाद को स्वीकार करता है।
72 वर्ष की आयु में महावीर की मृत्यु 468 ई0पू0 में बिहार के पावा (राजगृह) में हुयी थी।
मल्लराजा सस्तिपाल के राजप्रसाद मंे महावीर स्वामी को निर्वाण प्राप्त हुआ था।
-शेष अगले भाग में