बौद्व धर्म (प्राचीन भारतीय इतिहास-29)

बौद्व धर्म

      बौद्व धर्म के संस्थापक गौतम बुद्ध थे।

      गौतम बुद्ध का जन्म 5630पू0 कपिलवस्तु के लुम्बिनी नामक ग्राम में हुआ था। बुद्ध का प्रारम्भिक नाम सिद्धार्थ था।

      इनके पिता शुद्धोधन शाक्य क्षत्रिय कुल के मुखिया थे ।

      इनकी माता महामाया कोलिय वंश की थी जिनकी मृत्यु इनके जन्म के 7वें दिन ही हो गयी थी।

      इनका पालन पोषण इनकी सौतेली माता प्रजापति गौतमी ने किया था। गौतम का विवाह यशोधरा से हुआ जो शाक्य कुल की थी, यशोधरा का अन्य नाम-बुद्धवंश-भद्रकच्छन्ना, ललित विस्तर-गोपा, महावदानसुत्त-विम्वा।

      सिद्वार्थ ने चार दृश्यों को देखा और उनका मन व्यथित हो गया जिनका क्रम निम्न है-

      प्रथम - बूढ़ा व्यक्ति

      द्वितीय      - बीमार व्यक्ति

      तृतीय - मृत व्यक्ति

      चतुर्थ - प्रसन्नचित्त सन्यासी

      सांसारिक समस्याओं से व्यथित होकर सिद्धार्थ ने 29 वर्ष की अवस्था मे गृह त्याग किया।

      उनके गृह त्याग को ही बौद्ध धर्म मेें महाभिनिष्क्रमण कहा जाता है।

      गृह त्याग के बाद सबसे पहलेे वैशाली में सांख्य दर्शन के विद्वान आलार-कलाम (प्रथम गुरू) से  शिक्षा ग्रहण की।

      इसके पश्चात् रूद्रक रामपुत्त से शिक्षा ग्रहण की।

      इसके पश्चात् उरूवेला गये जहाँ पर पाँच ब्राह्मण भिक्षुओं के साथ कठोर तपस्या की।

      बिना अन्न, जल ग्रहण किये हुये 6 वर्ष की कठिन तपस्या के बाद 35 वर्ष की अवस्था में वैशाख पूर्णिमा की रात निरंजना नदी के तट पर उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ। ज्ञान प्राप्ति के बाद सिद्धार्थ बुद्ध के नाम से जाने गये।

-शेष अगले भाग में

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