चौरी - चौरा कांड पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए l

लेकिन 7 दिन का समय समाप्त होने के पूर्व ही एक ऐसी घटना हुई , जिसने सम्पूर्ण स्थिति को बदल दिया l 5 February , 1922 ko गोरखपुर जिले के चौरी - चौरा नामक ग्राम में पुलिस के बल प्रयोग से जनता ने उत्तेजित होकर थाने में आग लगा दी , जिसके फलस्वरूप थानेदार और 21 सिपाही जल कर मार गए l अहिंसावादी गांधी हिंसा के इस क्रूर प्रयोग को सहन नहीं कर सके , चितरंजन दास , मोतीलाल नेहरू , लाला लाजपतराय  और सुभाष चन्द्र बोस आदि सभी नेताओ द्वारा मना किए जाने पर भी 11 February , 1922 को आन्दोलन स्थगित कर दिया l 10 march , 1922 को गांधी जी गिरफ्तार कर लिए गए तथा उनपर मुकदमा चला कर 6 वर्ष की सजा दे दी गई l 
मोतीलाल नेहरू और लाला लाजपत राय ने जेल से ही लंबे पत्र लिखकर गांधी जी को " किसी एक स्थान के पाप को कारण सभी देश को दण्ड देने के लिए आड़े हाथो लिया l " सुभाष चन्द्र बोस ने सामान्य भावना को व्यक्त करते हुए कहा " ठीक उस समय जबकि जनता का उत्साह चरमोत्कर्ष पर था , वापस लौटने का आदेश दे देना राष्ट्रीय दुर्भाग्य से कम न था l " 
बहुत बड़ी संख्या में कांग्रेसियों और जनता के एक भाग द्वारा आन्दोलन के स्थगन को राष्ट्रीय अपमान समझा गया l आन्दोलन के स्थगित के स्थगित होने से हिंदू - मुस्लिम एकता पर भी विपरीत प्रभाव पड़ा l
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