बिंबिसार का विवरण

बिम्बिसार (558-491 ईसा पूर्व) गौतम बुद्ध के सबसे बड़े संरक्षक होने के साथ-साथ प्राचीन भारतीय साम्राज्य में मगध राज्य के प्रारम्भिक राजाओं में से एक था। उन्होंने अपने राज्य के पूर्वी क्षेत्र को अंगा नामक स्थान तक विस्तृत कर दिया था, जो भविष्य में मौर्य साम्राज्य के विशाल विस्तार की नींव साबित हुआ।

मगध के राजा बिम्बिसार की राजधानी राजगीर थी ।बिम्बिसार एक कूटनीतिज्ञ और दूरदर्शी शासक था । उसने प्रमुख राजवंशों में वैवाहिक सम्बन्ध स्थापित कर राज्य को फैलाया ।सबसे पहले उसने लिच्छवि गणराज्य के शासक चेतक की पुत्री चेलना के साथ विवाह किया । दूसरा प्रमुख वैवाहिक सम्बन्ध कौशल राजा प्रसेनजीत की बहन महाकौशला के साथ विवाह किया । इसके बाद भद्र देश की राजकुमारी क्षेमा के साथ विवाह किया ।

महावग्ग के अनुसार बिम्बिसार की 500 रानियाँ थीं । उसने अवंति के शक्ति्शाली राजा चन्द्र प्रद्योत के साथ दोस्ताना सम्बन्ध बनाया । सिन्ध के शासक रूद्रायन तथा गांधार के मुक्कुस रगति से भी उसका दोस्ताना सम्बन्ध था । उसने अंग राज्य को जीतकर अपने साम्राज्य में मिला लिया था वहाँ अपने पुत्र अजातशत्रु को उपराजा नियुक्तक किया था।

बिम्बिसार महात्मा बुद्ध का मित्र और संरक्षक था । विनयपिटक के अनुसार बुद्ध से मिलने के बाद उसने बौद्ध धर्म को ग्रहण किया, लेकिन जैन और ब्राह्मण धर्म के प्रति उसकी सहिष्णुता थी । बिम्बिसार ने करीब ५२ वर्षों तक शासन किया । बौद्ध और जैन ग्रन्थानुसार उसके पुत्र अजातशत्रु ने उसे बन्दी बनाकर कारागार में डाल दिया था जहाँ उसका 493 ई. पू. में निधन हो गया ।

बिम्बिसार ने अपने बड़े पुत्र “दर्शक" को उत्तराधिकारी घोषित किया था ।भारतीय इतिहास में बिम्बिसार प्रथम शासक था जिसने स्थायी सेना रखी ।बिम्बिसार ने राजवैद्य जीवक को भगवान बुद्ध की सेवा में नियुक्त् किया था ।बौद्ध भिक्षुओं को निःशुल्क जल यात्रा की अनुमति दी थी ।बिम्बिसार की हत्या महात्मा बुद्ध के विरोधी देवव्रत के उकसाने पर अजातशत्रु ने की थी ।

Posted on by