रायसीना डायलॉग

रायसीना डायलॉग भारत द्वारा आयोजित एक ऐसा वार्षिक सम्मेलन है, जिसमें विभिन्न राष्ट्रों के हितधारक, राजनेता, पत्रकार, उच्चाधिकारी तथा उद्योग एवं व्यापार जगत से संबंधित लोग एक मंच पर अपने विचार साझा करते हैं। इस डायलॉग को सिंगापुर में आयोजित शांगरी ला वार्ता की तर्ज पर आयोजित किया जाता है। पहली बार इस डायलॉग का आयोजन मार्च, 2016 में किया गया था। हाल ही में रायसीना डायलॉग का दूसरा संस्करण आयोजित किया गया।

  • द्वितीय रायसीना डायलॉग 17-19 जनवरी, 2017 के मध्य नई दिल्ली के ताज पैलेस होटल में आयोजित किया गया।
  • रायसीना डायलॉग भारत की प्रमुख भू-राजनीति व अर्थशास्त्रीय चर्चा का एक मंच है।
  • इस सम्मेलन का केंद्रीय विषय-‘द न्यू नॉर्मल : मल्टीलेटेरेलिज्म विद मल्टीपोलेरिटी’ (The New Normal : Multilateralism with Multipolarity) था।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने द्वितीय रायसीना डायलॉग का उद्घाटन किया और उद्घाटन भाषण भी दिया।
  • इस सम्मेलन का आयोजन विदेश मंत्रालय, भारत सरकार व प्रेक्षक अनुसंधान प्रतिष्ठान (Observer Research Foundation) द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
  • इस सम्मेलन में 65 देशों के लगभग 250 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
  • सम्मेलन में भारत के विदेश राज्य मंत्री एम.जे. अकबर, अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई, ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री केविन रूड, यूनाइटेड किंगडम के विदेश और राष्ट्रमंडल मामलों के राज्य सचिव बोरिस जॉनसन तथा नेपाल के विदेशी मंत्री प्रकाश शरण महत समेत कई गणमान्य व्यक्तियों ने हिस्सा लिया तथा संबोधित भी किया।
  • ज्ञातव्य है कि ‘रायसीना’ शब्द नई दिल्ली स्थित रायसीना पहाड़ियों से संबंधित है। इसी पहाड़ी पर राष्ट्रपति भवन सहित कई महत्वपूर्ण कार्यालय स्थित हैं।
  • प्रधानमंत्री ने अपने उद्घोषण भारत का अंत ऋग्वेद के इस सूक्त से किया- ‘आ नो भद्रोः क्रत्वो यन्तु विश्वतः’ अर्थात अच्छे विचार सभी ओर से आने दो।

द्वितीय रायसीना डायलॉग में प्रधानमंत्री मोदी के उद्घाटन

भाषण का मुख्य अंश

  • दुनिया को भारत के सतत विकास की उतनी ही जरूरत है, जितनी भारत को दुनिया की (The world needs India’s sustained rise as much as India needs the world)।
  • मई, 2014 में भारत के लोगों ने भी अपने लिए एक नया भविष्य लिखा।
  • मेरे साथी भारतवासियों ने एक आवाज में अपनी बात रखी और मेरी सरकार को ऐसा जनादेश दिया कि मैं बदलाव ला सकूं।
  • हर कार्य दिवस के दौरान मेरी कार्य सूची हर भारतीय को समृद्धि और सुरक्षा की ओर ले जाने की मुहिम से संचालित होती है।
  • बहुकोणीय दुनिया और तेजी से बढ़ता बहुध्रुवीय एशिया आज का एक अहम तथ्य है और हम इनका स्वागत करते हैं।
  • मेरे लिए ‘सब का साथ, सब का विकास’ का दृष्टिकोण केवल भारत के संदर्भ में नहीं है। यह पूरी दुनिया के लिए मेरी सोच है।
  • सभी मानने लगे हैं कि मौजूदा सदी एशिया की है।
  • सबसे तेजी से बदलाव दक्षिण एशिया में ही हो रहे हैं। प्रगति और समृद्धि का खजाना इस क्षेत्र में और इसके परिदृश्य में समाहित है।
  • दक्षिण एशिया के लोगों के बीच खून का रिश्ता है, इनका साझा इतिहास, संस्कृति और इच्छाएं हैं।
  • हमने अपने पड़ोस के लिहाज से अपनी नीति में व्यापक बदलाव लाते हुए ‘पड़ोस प्रथम’ का रास्ता अपनाया है।
  • पिछले ढाई साल के दौरान हमने अपने सभी पड़ोसियों के साथ साझेदारी की है, ताकि क्षेत्र को एकजुट किया जा सके।
  • शांति के मार्ग पर भारत अकेला नहीं चल सकता। पाकिस्तान को भी इस सफर के लिए कदम उठाने होंगे।
  • पाकिस्तान को अगर भारत के साथ बातचीत के रास्ते पर बढ़ना है, तो इसे आतंकवाद का रास्ता हर हाल में छोड़ना होगा।
  • हिंद महासागर क्षेत्र की शांति, समृद्धि और सुरक्षा का मुख्य जिम्मा इस क्षेत्र के लोगों का ही है।
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