शाक्त धर्म के सिद्धांत तथा आचार्

  • शक्त मत के अनुयाई महामंत्री देवी को आदि मानकर उसकी आराधना करते हैं।
  • वही सृष्टि की उत्पत्ति पालन तथा सहार करती हैं। शक्ति साधक देवी के किसी एक रूप को इस्तेमाल कर उसके साथ अपना तदात्मय विश्वास रखता है।
  • शाक्त धर्म में कुंडलिनी नामक रहस्यमय शक्ति का अधिक महत्व है।
  • शाक्त संप्रदाय में देवी की स्तुति प्राय तीन प्रकार की जाती है.
१. पहले मैं महापद्मा वन में शिव की गोदी में बैठी हुई देवी का ध्यान किया जाता है. उनका ध्यान हृदय तथा मन को आह्लादित करता है।
२. इसमें भूर्जपत्र रेशमी वस्त्र अथवा स्वर पत्र की सहायता से 9 योनियों का वृत्त बनाकर उसके मध्य में एक योनि का चित्र खींचकर चक्र बनाया जाता है इसे श्रीचक्र कहते हैं।
३. इसमें दार्शनिक ढंग से ज्ञान के द्वारा देवी की उपासना की जाती है. इस पद्धति में अध्ययन था ज्ञान को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान की गई है. सुचिता चरणों की इसमें निंदा करते हुए उन्हें त्याज्य बताया गया है।
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