अनारकली का मक़बरा

पाकिस्तान के पंजाब सिविल सेक्रेटरिएट के पास एक ताजमहल के रंग का मकबरा है। इसे अनारकली का मकबरा कहा जाता है। क्या बादशाह को नाचीज की मुहब्बत के आगे झुकना पड़ा था? कुछ तो कहते हैं कि बादशाह ही अनारकली से प्रेम कर बैठा था।अनारकली का नाम नादिरा बेगम हुआ करता था शर्फुन्निसा भी कहा जाता था। ईरान से आई थीं। व्यापारियों के कारवां में लाहौर तक पर खूबसूरती इतनी थी कि वहीं से हल्ला हो गया उस वक्त बादशाहों को किसी चीज का डर नहीं रहता था । इज्जत का भी नही क्योंकि जनता के मन में इज्जत की जगह डर से काम चल जाता था तो अकबर बादशाह के दरबार में नादिरा को तलब किया गया और वहां उसे अनारकली नाम मिला।फिंच के मुताबिक अनारकली अकबर की कई पत्नियों में से एक पत्नी थी।  जिससे अकबर को बेटा भी था दानियाल शाह ।बाद में अनारकली के जहांगीर से इश्क की अफवाह उड़ी जहांगीर अकबर का बेटा था जोधाबाई से अकबर ने इस बात पर खफा होकर अनारकली को लाहौर किले की दीवारों में चुनवा दिया ।बाद में जहांगीर ने उसी जगह एक खूबसूरत मकबरा बनवाया। नूर अहमद चिश्ती ने अपनी किताब तहकीकात-ए-चिश्तिया में लिखा है कि अकबर के अनारकली से बेपनाह मुहब्बत होने की वजह से बाकी रानियां चिढ़ गई थीं। इसीलिए जब अकबर डेक्कन गया तो उसके खिलाफ षड़यंत्र होने लगा। वो बीमार पड़ी और मर गई उसकी बांदियों ने सुसाइड कर लिया क्योंकि अकबर की मुहब्बत का डर था ।कहते हैं कि जब जहांगीर 14 साल तक घर से बाहर रहने के बाद वापस आया तो उसके सम्मान में मुजरा कराया गया ।उसी मुजरे में ईरान से आई अनारकली थी। सलीम उसे दिल दे बैठा और अकबर ने दिमाग से अनारकली को चुनवा दिया दीवार में पर इंडियन दर्शक उस वक्त ये अंत बर्दाश्त नहीं कर सकते थे। इसीलिए फिल्म में अकबर अनारकली को गुप्त रास्ते से बाहर भेज देता है ।

कन्हैया लाल ने अपनी किताब तारीख-ए-लाहौर में लिखा है कि अनारकली की बीमारी से ही मौत हुई थी। बाद में अकबर ने मकबरा बनवाया था । सिख राजाओं ने उसे तोड़वा दिया था बाद मैं अंग्रेजों ने चर्च बनवा दिया था ।

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