संविधान में सरकार का स्वरूप संसदीय है। फलस्वरुप राष्ट्रपति केवल कार्यकारी प्रधान होता है। मुख्य शक्तियां प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल में निहित होती हैं। अन्य शब्दों में राष्ट्रपति अपने कार्यकारी शक्तियों का प्रयोग प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल की सहायता और सलाह से करता है।
डॉ भीमराव अंबेडकर ने राष्ट्रपति के वास्तविक स्थिति को निम्न प्रकार से बताया है।
भारतीय संविधान में भारतीय संघ के कार्यकलापों का एक प्रमुख होगा, जिसे संघ का राष्ट्रपति कहा जाएगा। कार्यपालक उपाधि अमेरिका के राष्ट्रपति की याद दिलाती है। नाम में समानता के अतिरिक्त अमेरिका में प्रचलित सरकार एवं भारतीय संविधान के तहत अपनाई गई सरकार में अन्य कोई समानता नहीं है। सरकार के अमेरिकी व्यवस्था को राष्ट्रपति व्यवस्था कहा जाता है और भारतीय व्यवस्था को संसदीय व्यवस्था कहा जाता है। अमेरिका के राष्ट्रपति व्यवस्था में कार्यकारी व प्रशासनिक शक्तियां राष्ट्रपति के निहित हैं भारतीय संविधान के अंतर्गत राष्ट्रपति की स्थिति वही है जो ब्रिटिश संविधान के अंतर्गत राजा की स्थिति है। वह राष्ट्र का प्रमुख होता है पर कार्यकारी नहीं होता वह राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करता है उस पर शासन नहीं करता है। वह राष्ट्र का प्रतीक है वह प्रशासन में औपचारिक रूप से सम्मिलित है अथवा एक मुहर के रूप में है जिसके नाम पर राष्ट्र के निर्णय लिए जाते हैं। वह मंत्रिमंडल के सलाह पर निर्भर है । वहां उसके सलाह के विरुद्ध अथवा उनके सलाह के बिना कुछ नहीं कर सकता है। अमेरिका का राष्ट्रपति किसी भी सचिव को किसी भी समय हटा सकता है। भारत के राष्ट्रपति के पास ऐसा करने का शक्ति नहीं है जब तक के उसके मंत्रियों का संसद में बहुमत हो।