सिंधु प्रदेश में कुछ ऐसी सामग्रियां मिली है, जिनके आधार पर यह मानना पड़ता है कि यहां के लोग चित्रकला से भी परिचित थे।
कुछ ऐसे मोहरे मिली हैं जिन पर अनेक तरह के आकर्षक चित्र बने हैं एवं साधुओं के चित्रकला के जीते जागते उदाहरण हैं।
यहां के चित्रों को देखकर ऐसा लगता है कि चित्रकार ने बड़ी दृढ़ता एवं विश्वास के साथ चित्रों को बनाया है ।
इसमें भावनाओं की कोमलता का अभाव तो बिल्कुल दिखाई ही नहीं देता है।
अलग-अलग मोहरों पर भिन्न-भिन्न प्रकार के चित्रों को देखकर विद्वानों का कहना है कि -यह भिन्न-भिन्न आर्थिक व्यवसायों की पहचान है।
मोहरों के कुछ चित्र तो धार्मिक महत्व के भी लगते हैं ।
ताबीज के ऊपर भी अन्य चित्रों के प्रमाण मिले हैं।