भारतीय अर्थव्यवस्था का औपनिवेशिक अर्थव्यवस्था में परिवर्तन

प्लासी और बक्सर युद्ध के साथ ही अंग्रेजों का बंगाल जैसे समृद्ध प्रवेश पर अधिकार हो गया तथा भारतीय अर्थव्यवस्था, औपनिवेशिक अर्थव्यवस्था में परिवर्तन हो गई। सभी आर्थिक संसाधनों पर अंग्रेजों का एकाधिकार स्थापित हो गया। ईस्ट इंडिया कंपनी बंगाल के प्रादेशिक राजस्व के बच्चे हुए भाग को निवेश के लिए उपयोग में लाती थी, इसलिए आयात काम होता था तथा निर्यात अधिक होता था। बंगाल के अन्तर्देशीय व्यापार में अंग्रेजों की हिस्सेदारी बड़े पैमाने में हो गई। कंपनी के कर्मचारियों ने नमक, सुपारी, तम्बाकू जैसी वस्तुओं के व्यापार पर कब्जा कर लिया, जो अभी तक यूरोपीय व्यापारियों के लिए प्रतिबंधित थी। भारतीय माल पर ब्रिटेन में भरी शुल्क लगाकर तथा भारत में ब्रिटिश समान समान के आयात को प्रोत्साहन देकर भारत के उत्पादन और व्यापार को नष्ट कर दिया गया।  बुनकर कंपनी के बजाय दूसरे खरीददारों को अपना माल बेचने का दुस्साहस करते थे, उनका माल जब्त कर लिया जाता था तथा उनपर जुर्माना कर उन्हें जेल में डाल दिया था। 1765 ई. में क्लाइव ने एक सोसाइटी के माध्यम से नमक के निर्माण पर एकाधिकार कर लिया। 1768 ई. में इस प्रथा को समाप्त कर जमींदार तथा भारतीय व्यापारियों को , कंपनी की सरकार को 30 प्रतिशत देकर नमक निर्माण की अनुमति दे दी गई। 1772 ई. में यह सुविधा फिर समाप्त कर दी गई। 1758 ई. में राबर्ट क्लाइव ने बंगाल के कठपुतली नवाब मीर जाफर से शोर व्यापार का एकाधिकार प्राप्त  लिया।
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