टीपू सुल्तान की शासन व्यवस्था

टीपू सुल्तान का प्रशासन केंद्रमुखी था। सुल्तान ही समस्त सैनिक, असैनिक और राजनीतिक शक्ति का केंद्र था। सुल्तान स्वयं ही विदेश मंत्र, मुख्य सेनापति और न्यायाधीश था।

केंद्रीय प्रशासन -: टीपू के प्रशासन में प्रधानमंत्री या वजीर का पद नहीं था। केंद्रीय प्रशासन के रूप में सात विभाग या बोर्ड थे। ये विभाग मीर आसिफ के अधीन होते थे। मीर आसिफ सुल्तान के प्रति उत्तरदाई होता था ये सात विभाग थे -: राजस्व तथा वित्त, सेना विभाग, जुमला विभाग, तोपखाना तथा दुर्ग रक्षा विभाग, वाणिज्य विभाग, नाविक विभाग, कोष और टंकण विभाग, । इन सात विभागों के अतिरिक्त तीन अन्य छोटे विभाग भी थे -: डाक तथा गुप्तचर विभाग, लोक निर्माण विभाग और पशु विभाग।

प्रांतीय तथा स्थानीय प्रशासन -: टीपू सुल्तान ने 1784 के बाद अपने साम्राज्य को सात प्रांतों में बांट दिया। वे आसफी टुकड़ी कहलाते थे। आगे चलकर इन सात प्रांतों की संख्या 17 हो गई। प्रांतों में मुख्य अधिकारी आसिफ और फौजदार होते थे। ये दोनों पदाधिकारी एक दूसरे पर नियंत्रण भी रखते थे। प्रांतों को जिलों और जिलों को गांवों में बांटा गया था। पंचायतें स्थानीय प्रशासन का प्रबंध करती थी।

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