सोलवीं शताब्दी में जर्मनी के मार्टिन लूथर के नेतृत्व में एक महान धर्म सुधार आंदोलन की शुरुआत हुई, जिसने पॉप वर्क कैथोलिक चर्च की निरंकुश सत्ता को सीधी चुनौती दी। इस विद्रोह के परिणाम स्वरूप प्रोटेस्टेणटवाद की उत्पत्ति हुई।
धर्म सुधार आंदोलन में धर्म के मूल स्वरूप के लिए कोई चुनौती नहीं थी, विरोध केवल व्यवहार एवं कार्यान्वयन का था। किसी ने भी यीशु मसीह ,बाइबल आदि से अनास्था प्रकट नहीं की थी।