अर्थव्यवस्था की स्थिति : एक नजर में-
- केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जारी प्रथम अग्रिम अनुमानों के अनुसार वर्ष 2017- 18 में जीडीपी वृद्धि दर के 7.5% रहने का अनुमान है जबकि विगत 3 वर्षों 2014-17 में यह 7% से अधिक रहा।
- यह वृद्धि दर वर्ष 2017-18 के लिए पूर्वानुमानित 6.5 -6.75% के दायरे से थोड़ा सा- कम है ।
- वर्ष 2014 -15 से 2017-18 की अवधि के लिए जीडीपी वृद्धि का औसत 7.3 प्रतिशत रहा जो, विश्व के प्रमुख देशों उसमें सबसे अधिक है।
- केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जारी प्रथम अग्रिम अनुमानों के अनुसार सतत बुनियादी मूल्य पर सकल मूल्य वर्धन वृद्धि दर वर्ष 2017 -18 में 6.1 प्रतिशत अनुमानित है जबकि वर्ष 2016-17 में यह 6.6 प्रतिशत अनुमानित थी जीवीए वृद्धि दर में यह कमी कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र तथा उद्योग के क्षेत्र में कम वृद्धि के कारण हुई।
- वर्ष 2016-17 की 7.7 परिषद की तुलना में वर्ष 2017- 18 में सेवा क्षेत्र में 8.3% वृद्धि रहने का अनुमान है।
- प्रथम अग्रिम अनुमानों के तहत वर्ष 2017 -18 में जीडीपी में वृद्धि 6.7 प्रतिशत होने की आशा है जबकि आधार कीमतों पर वास्तविक जीवीए में 6.1 वृद्धि होने की आशा है।
- वर्ष 2012 -13 और 2014-15 के दौरान वास्तविक जीडीपी में औसतन वृद्धि 6.4% रही , जबकि इसी अवधि में वृद्धि पर 12.5% थी इसकी तुलना में 2015-16 से 2017-18 तक 3 वर्ष की अवधि के दौरान वास्तविक और मौद्रिक जीडीपी में औसत वृद्धि क्रमशः 7.2 प्रतिशत और 10.1% होने की संभावना है।
- विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि वर्ष2017- 18 की पहली छमाही में 4.0% से सुधर कर दूसरी छमाही में 5.1% होने की आशा है।
- वास्तविक प्रति व्यक्ति आय (2011-12 के स्थिर कीमतों पर प्रति व्यक्ति निवल राष्ट्रीय आय के संदर्भ में मापी) वर्ष 2015- 16 के 77,803 रुपए से बढ़कर वर्ष 2017 -18 में 86,660 ₹7 हो जाने की संभावना है जो 5.5% की वार्षिक वृद्धि की घोतक है