ऊष्मीय विकिरण

प्रत्येक वस्तु अपने दांत के कारण उसमें ऊर्जा का उत्सर्जन करती रहती है इसे ऊष्मीय विकिरण तथा विकिरण ऊर्जा कहते हैं।
यह विकिरण अवरक्त किरणों तथा तरंगों के रूप में होते हैं। इनमें ऊष्मा तो होती है, परंतु दिखाई नहीं देती। इन तरंगों के संचरण के लिए माध्यम की आवश्यकता नहीं होती। जब यह उसमें ऊर्जा किसी अन्य वस्तु पर गिरती है तो अवशोषित होकर या वस्तु का ताप बढ़ा देती है।

ऊष्मीय विकिरण के गुण:

१-उसमें विकिरण विद्युत चुंबकीय तरंगों के रूप में चलते हैं।
२-इसमें संचरण में माध्यम की आवश्यकता नहीं होती।
३-यह प्रकाश की चाल से सीधी रेखा में चलते हैं।
४-ऊष्मीय विकिरण की तीव्रता वस्तु से बिंदु की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
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