देश की सुरक्षा का सवाल

वोट बैंक के लोभ की सजा भुगतता  असम शीर्षक के तहत लिखे अपने लेख में कुलदीप नैयर ने घुसपैठियों और अवैध नागरिकों के मुद्दे को तिल का ताड़ बनाने के पीछे वोट बैंक की राजनीति को प्रमुख कारण बताया है। सबसे पहले तो यह कहना उचित होगा कि हमारे देश की राजनीति का स्तर इस हद तक गिर चुका है कि यह वोट बैंक के लिए देश की एकता अखंडता और संप्रभुता को भी दांव पर लगाने से गुरेज नहीं किया जाता वोट बैंक के कारण ही तो आज तक देश में नक्सलवाद समस्या नासूर बनी हुई है और कश्मीर समस्या का हल नहीं निकल पाया है एनआरसी की रिपोर्ट पर राजनीति के गलियारे में जो हंगामा मचा है उसके पीछे सत प्रतिशत वोट बैंक की राजनीति है अगर ऐसा नहीं होता तो देश की सुरक्षा और विकास को ध्यान में रखते हुए इस रिपोर्ट की खामियों को दूर करने पर भी सभी राजनीतिक दल मिल जुलकर प्रयास, लेकिन जिस देश में हर मुद्दे पर ऊंची राजनीति होती आ रही हो वहां घुसपैठियों के आंकड़े पर भी आपत्तिजनक राजनीति कोई चकित करने वाली बात नहीं है।

देश की सुरक्षा और विकास के बाधक तत्व पर पहुंची राजनीति काफी शर्मनाक और निंदनीय है बेशक भारत दुनिया का सबसे बड़ा धर्मनिरपेक्ष देश है लेकिन वह धर्मशाला नहीं बन सकता और ना ही यह बोल सकता है कि देश का विभाजन क्यों हुआ था।

आरसी को लेकर कांग्रेस हुआ तृणमूल कांग्रेस जैसी विपक्षी दल शायद इसीलिए बौखला कर हंगामा कर रहे हैं क्योंकि उसे से उनका जो वोट बैंक बड़ा था उस पर खतरे के बादल मंडराते हुए दिख रहे हैं।

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