पर्यावरण भाग 4- पारिस्थितिकी तंत्र में आहार शृंखला या भोजन चक्र

किसी भी पारिस्थितिकी तंत्र के सुचारु कार्यान्वयन में ऊर्जा का प्रमुख स्रोत सूर्य होता है। विभिन्न प्रकार की वनस्पतियां सौर ऊर्जा की सहायता से भूमि और वायु से विभिन्न पदार्थ लेकर प्रकाश संश्लेषण विधि द्वारा आहार उर्जा या भोजन निर्माण कर अपनी वृद्धि करते हैं । इन वनस्पतियों का भक्षण शाकाहारी जीव प्रमुख रूप से करते हैं । दूसरी ओर मांसाहारी जीव शाकाहारी जीवो का भक्षण भोजन के रूप में करते हैं साथ ही सर्वाहारी जीव मानव शाकाहारी एवं मांसाहारी जीवों के भक्षण के साथ साथ विभिन्न प्रकार की वनस्पतियों का उपयोग अपनी उदरपूर्ति के लिए करता है । वनस्पतियों तथा प्राणियों की मृत्यु हो जाने पर सूक्ष्म जीवों की बैक्टीरिया तथा कवक मृत जीवों का विघटन कर उसे जीवांश के रूप में मिट्टी में मिला कर मिट्टी को उपजाऊ बना देते हैं । भूमि पर पुनः वनस्पति मिट्टी से उपजाऊ तत्वों तथा जल प्राप्त कर सूर्य ऊर्जा की उपस्थिति में भोजन निर्माण कर अपनी वृद्धि करते रहते हैं तथा वन्यजीवों के लिए भोजन तैयार करते रहते हैं । इस प्रकार यह चक्र लगातार चलता रहता है जिसे भोजन चक्र कहा जाता है । इस चक्र में आहार ऊर्जा को स्थानांतरण तथा संचलन निम्न पोषण स्तर से उच्च पोषण स्तरों में श्रंखलाबद्ध रूप में चलता रहता है ।इसीलिए इसे आहार श्रृंखला भी कहा जाता है।
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