सामाजिक तथा सांस्कृतिक जागरण के कारण

19वीं शताब्दी में सामाजिक तथा सांस्कृतिक जागरण के लिए अनेक कारण उत्तरदाई थे।

* इसका पहला और सर्वप्रमुख कारण ब्रिटिश शासन की स्थापना था। देश राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक जीवन पर इसका गहरा प्रभाव पड़ा तथा बौद्घिक विकास के लिए अनुकूल स्थितियां उत्पन्न हुईं।

* दूसरा महत्वपूर्ण कारण प्राच्यविदों का वह श्रमसाध्य प्रयास था, जिससे भारत के अतीत को लोक प्रसिद्धि मिली। अन्य विद्वानों के अतिरिक्त सर विलियम जोन्स, चार्ल्स विल्किन तथा मैक्समूलर द्वारा इस क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए गए। राजाराममोहन राय, राधाकांत देव, राजेन्द् लाल मिश्र तथा हरी प्रसाद शास्त्री आदि अनेक प्रतिष्ठित भारतीय मनीषियों ने भी भारत के अतीत की खोज एवं पुनर्व्याख्या करने में अपूर्व योगदान दिया। अधीन राष्ट्र होने के कारण भारत के अतीत में झांकने पर और अधिक बल दिया गया। राष्ट्रीय जागरण की स्वस्थ भावना तथा विदेशी शासन से मुक्ति के लिए उत्कृष्ट संकल्प के अतिरिक्त कभी कभी पुनर्जीवित हिंदूवाद के माध्यम से संसार पर आध्यात्मिक विजय पाने के लिए उग्र राष्ट्रीयतावादी स्वप्नों की कल्पना की गई।

* सुधार आंदोलन के प्रसार का तीसरा कारक उत्कृष्ट रचनात्मक साहित्य था। प्राचीन एवं नवीन का अद्भुत संयोजन तथा प्राचीन भारत की श्रेष्ठ साहित्यिक परंपराओं का ब्रह्म आधुनिक जगत की संस्कृति की उत्तम विशेषताओं के साथ भव्य सम्मिलन इसकी विशेषता थी।

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