प्राचीन भारतीय इतिहास-33 वैष्णव धर्म

वैष्णव धर्म

      वैष्णव धर्म (भागवत) के प्रर्वतक वासुदेव कृष्ण थे जो वृष्णि वंशीय यादव कुल के नेता थे।

      श्री कृष्ण का उल्लेख सर्वप्रथम छान्दोग्य उपनिषद में देवकी पुत्र और अंगरिस के शिष्य के रूप में हुआ है।

      विष्णु के दस अवतारो का उल्लेख मत्स्य पुराण मे मिलता है इन अवतारो में कृष्ण का उल्लेख नही हंै। 

      प्रमुख अवतार इस प्रकार है-मत्स्य, कूर्म, वाराह, नृसिंह, वामन, परशुराम, राम, बलराम, बुद्ध और कल्कि या कलि (भावी अवतार)।

      वैष्णवधर्म में सर्वाधिक महत्व भक्ति को दिया गया है।

      भागवत धर्म प्रथम अभिलेखीय साक्ष्य विदिशा (वेसनगर) स्थित गरूण स्तम्भ है। इसकी स्थापना तक्षशिला का यवन राजदूत हैलियोडोरस ने किया था। हेलियोडोरस तक्षशिला के शासक एंटियालकीडास के दूत के रूप में शंुग शासक भागभद्र के दरबार में आया था।

      मेगास्थनीज सूरसेन (मथुरा) में हेराक्लीज (कृष्ण) की पूजा का उल्लेख किया है।

कुछ प्रचलित सम्प्रदाय एवं उनके संस्थापक निम्नलिखित है -

प्रमुख सम्प्रदाय            मत               आचार्य

वैष्णव सम्प्रदाय           विशिष्टाद्वैत        रामानुज

ब्रहम सम्प्रदाय            द्वैत वाद          आनन्द तीर्थ

रूद्र सम्प्रदाय              शुद्धाद्वैत           बल्लभाचार्य

सनक सम्प्रदाय            द्वैताद्वैत          निम्बार्क

बरकरी                   -                 नामदेव

श्रीवैष्णव                 -                 रामानुज

परमार्थ                  -                 रामदास

-शेष अगले भाग में

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