प्राचीन भारतीय इतिहास-35 शिशुनाग वंश

शिशुनाग वंश

      शिशुनाग ने अपनी राजधानी पाटलिपुत्र से हटाकर वैशाली में स्थापित किया।

      शिशुनाग की सर्वाधिक महत्वपूर्ण सफलता अवन्ति तथा वत्स राज्य पर उसकी विजय थी। 

      शिशुनाग का उत्तराधिकारी कालाशोक पुनः राजधानी से पाटिलपुत्र ले गया।

      शिशुनाग वंश का अन्ति़म राजा नंदिवर्धन था।

नन्द वंश

       नन्द वंश का संस्थापक महापद्मनंद था। महावोधिवंश में उसे उग्रसेन कहा गया है।

      पुराणों में महापद्मनन्द को सर्वक्षत्रान्तक(क्षत्रियों का नाश करने वाला) कहा गया है। विष्णुपुराण में दूसरा परशुराम कहा गया है।

      महापद्मनन्द के 8 पुत्रों में घनानन्द सिकन्दर का समकालीन था। इसे अग्रमीज कहा गया है।

      घनानन्द के समय 3250पू0 में सिकन्दर ने पश्चिमोत्तर भारत पर आक्रमण किया था।

      घनानन्द को चन्द्रगुप्त मौर्य ने युद्व में पराजित कर मगध पर मौर्य वंश की स्थापना की।

सिकन्दर

      सिकन्दर का जन्म 3560पू0 में मेसीडोनिया (यूनान) में हुआ था।

      सिकन्दर के पिता का नाम फिलिप था।

      सिकन्दर ने भारत विजय का अभियान 3260पू0 में प्रारम्भ मेें किया। सिकन्दर भारत में 19 महीने रहा।

      सिकन्दर का भारत में सबसे प्रसिद्ध युद्ध पंजाब मंे झेलम नदी के तट पर पौरव राजा पोरस के साथ हुआ था।

      इसे हाइडस्पीज या वितस्ता के युद्व के नाम से भी जाना जाता है। इस युद्ध में पोरस की पराजय हुयी।

      सिकन्दर की मृत्यु 3230पू0 में बेबीलनो में हो गयी थी। सिकन्दर की सहायता तक्षशिला का शासक आम्भी ने किया।

      सिकन्दर का जल सेनापति निर्याकस था।

      सिकन्दर के आक्रमण की तिथि (3260पू0) ने भारत के क्रमागत इतिहास लिखने में बड़ी सहायता की। 

      सिकन्दर व्यास नदी से वापस लौट गया।

-शेष अगले भाग में

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