मौर्य साम्राज्य
मौर्य वंश का संस्थापक चन्द्रगुप्त मौर्य था। जिसने 323ई0पू0 से 298ई0पू0 तक शासन किया था।
यूनानी लेखकों ने उसे सैण्ड्रोकोटट्स कहा था।
सर्वप्रथम विलियम जोन्स ने सैण्ड्रोकोटट्स की पहचान चन्द्रगुप्त मौर्य से की थी।
घनानन्द को हराने में चाणक्य ने चन्द्रगुप्त मौर्य की मदद ली थी जो बाद में चन्द्रगुप्त मौर्य का प्रधानमंत्री बना।
चाणक्य का वास्तविक नाम विष्णुगुप्त या कौटिल्य था। चाणक्य ने अर्थशास्त्र की रचना कौटिल्य नाम से की थी।
अर्थशास्त्र की विषय वस्तु राजनीति से सम्बन्धित हैं।
जैन लेखकांे से ज्ञात होता है कि चन्द्रगुप्त मौर्य के शासन काल के अन्तिम 12 वर्षों में मगध में भीषण अकाल पड़ा।
चन्द्रगुप्त मौर्य ने अपने पुत्र बिन्दुसार के पक्ष में सिंहासन छोड़कर जैन मुनि भद्रबाहु से जैन धर्म की दीक्षा ले ली।
चन्द्रगुप्त ने अपना अन्तिम समय कर्नाटक के श्रवण बेलगोला नामक स्थान पर बिताया तथा वही पर संलेखना विधि (उपवास) द्वारा शरीर त्याग दिया।
चन्द्रगुप्त ने 305 ई0पू0 मे ंसेल्यूकस को हराया था।
सन्धि के फलस्वरूप सेल्यूकस ने अपनी पुत्री हेलेन की शादी चन्द्रगुप्त के साथ कर दिया और दहेज के रूप में चार प्रान्त काबुल, कान्धार, हेरात एवं मकरान दिये और बदले में चन्द्रगुप्त मौर्य ने 500 हाथी उसे उपहार मे दिये।
-शेष अगले भाग में