प्राचीन भारतीय इतिहास-37 बिन्दुसार (298 से 272 ई0पू0)

बिन्दुसार (298 से 2720पू0)

      चन्द्रगुप्त का उत्तराधिकारी बिन्दुसार हुआ जो 2980पू0 मंे मगध की राजगद्दी पर बैठा।

      बिन्दुसार को अमित्रघातके नाम से जाना जाता है अमित्रघातका अर्थ है-शत्रु का विनाश करने वाला।

      बिन्दुसार आजीवक सम्प्रदाय का अनुयायी था।

      स्टैªवो के अनुसार यूनानी शासक एण्टियोकस ने डाइमेकस नाक राजदूत बिन्दुसार के दरबार में भेजा था।

      प्लिनी के अनुसार मिस्र का राजा टालमी फिलाडेलफस द्वितीय ने डायोनिसिस नामक राजदूत बिन्दुसार के दरबार के साम्राज्य में भेजा।

      जैन ग्रन्थो मे ंबिन्दुसार को सिंहसेन कहा गया हैै।

      बिन्दुसार के शासनकाल में तक्षशिला में दो विद्रोह हुये। जिसक दमन करने के लिए पहली बार अशोक को और दूसरी बार सुसीम को भेजा था।

      बौद्ध विद्वान तारानाथ ने बिन्दुसार को 16 राज्यों का विजेता बताया है।

-शेष अगले भाग में

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