प्राचीन भारतीय इतिहास-38 अशोक (273 से 232 ई0पू0)-1

बौद्ध अनुश्रुतियों के अनुसार अपने 99 भाइयों की हत्या कर बिन्दुसार की इच्छा के विरूद्ध अशोक 3730पू0 में मगध के सिंहासन पर बैठा।

      अशोक ने चार वर्ष के संघर्ष के पश्चात् 2690पू0 में मगध की राजगद्दी पर अपना राज्याभिषेक कराया। 

      अशोक के अधिकतम् लेखांे मे उसको ष्देवानां प्रियदर्शीष् नाम से सम्बोधित किया गया है।

      मास्की एवं गुर्जरा, नेट्टूर तथा उडेगोलम अभिलेख में उसका नाम अशोक नाम मिलता है तथा पुराणों में अशोक वद्र्वन मिलता है। मास्की अभिलेख में उसे बुद्धशाक्य कहा गया है।

      अशोक ने अपने अभिषेक के 8वें वर्ष अर्थात् 2610पू0 मंे कलिंग पर आक्रमण कर उसकी राजधानी तोसली पर अधिकार कर लिया। इसका उल्लेख 13वें शिलालेख में मिलता है।

      उपगुप्त नामक बौद्व भिक्षु ने अशोक को बौद्व धर्म मंे दीक्षित किया था।

      अशोक ने आजीवकों के लिये बराबर की पहाड़ियों में अजीवकों के निवास के लिए तीन गुफाओं का निर्माण करवाया जिसका नाम कर्ण चैपण, सुदामा तथा विश्व झोपड़ी है।

      अशोक की माता का नाम सुभ्रदंागी था।

      अशोक ने बौद्व धर्म के प्रचार के लिये अपने पुत्र महेन्द्र तथा पुत्री संघमि़त्रा को श्रीलंका भेजा था।

      अशोक के अभिलेखों की भाषा प्राकृत एवं लिपि ब्राह्मी, खरोष्ठी, ग्रीक एवं अरामाइक का प्रयोग हुआ हैं। लघुशिलालेख, स्तम्भलेख (लघु एवं दीर्घ) एवं गुहालेखों की लिपियाँ केवल ब्राह्मी है।

-शेष अगले भाग में

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