अशोक (273 से 232 ई0पू0)-2
अशोक के स्तम्भ लेख केवल ब्राहमी लिपि मंे थे।
अफगानिस्तान के लघमान (काबुल) का अभिलेख अरमाइक में है।
शारे-ए-कुना (कन्धार) से प्राप्त अभिलेख ग्रीक एवं अरामाइक (द्विभाषीय एवं द्विलिपिय) दो लिपियो एवं दो भाषाओ मंे है।
इसी प्रकार पाकिस्तान के शाहबाज गढ़ी एवं मानसेहरा से प्राप्त अशोक के अभिलेख खरोष्ठी लिपि में है।
1750 में टीफेन्थलर ने सबसे पहले दिल्ली में अशोक के स्तम्भ का पता लगाया। किन्तु अशोक के अभिलेखांे को सर्वप्रथम जेम्स प्रिन्सेप ने 1837 में पढ़ा।
कौशाम्बी अभिलेख को रानी का अभिलेख भी कहा जाता है ।
रूमिन्देई स्तम्भ लेख में अशोक द्वारा लुम्बनी ग्राम को कर मुक्त घोषित कर केवल 1/8 भाग कर के रूप मंे लेने की घोषणा की।
प्रथम पृथक शिलालेख में अशोक यह घोषणा करता है कि सभी मनुष्य मेरी संतान है।
सम्राट की सहायता के लिये एक मंत्री परिषद होती थी।
भब्रू या वैराट जयपुर (राजस्थान)-इसमें बौद्ध धर्म के तिरत्न बुद्ध, धम्म तथा संघ का उल्लेख हुआ है।
एर्रागुडि अभिलेख वूस्ट्टोफेडन शैली मेें लिखा गया है।
अशोक के दो अभिलेख को फिरोज तुगलक ने दिल्ली में स्थापित करवाया था।
अशोक ने अभिषेक के 10वें वर्ष बोधगया एवं 20वें वर्ष लुम्बिनी की यात्रा किया था।
पाँचवे शिलालेख में धर्ममहामात्रों का उल्लेख मिलता है।
-शेष अगले भाग में