राजस्थानी कला बीकानेर शैली (मारवाड़)

                                  बीकानेर शैली (मारवाड़)

● बीकानेर शैली का विकास 17वीं शदी के उपरान्त हुआ। राजा रायसिंह 1571 ई0 से 1611 के समय में चित्रित मेघदूत की एक प्रति प्राप्त हुयी, जो कि अपभ्रंश शैली में है।
●  राजा अनूपसिंह के समय में इस शैली के विशुद्ध चित्रों का निर्माण शुरू हुआ। अनूपसिंह के चित्रकारों में औरंगजेब द्वारा निस्कासित रूकुनुद्दीन प्रमुख चित्रकार था। रूकुनुद्दीन ने रसिक प्रिया और भागवत् पुराण का चित्रण किया जो तिथि युक्त है।
● मानसिंह 1803-1843 ई0 के समय में श्रृंगार विषयक चित्रों की अधिकता के चलते ये शैली चरमोत्कर्ष पर पहुँची। किन्तु इसके बाद उसका पतन हो गया।●  इस शैली के चित्रकारों में रूकुनुद्दीन स्त्री चित्र और शवीह बनाने में दक्ष था। लूफे इस शैली का अन्तिम चित्रकार था। जो प्रकृति चित्रण में माहिर था। इसका प्रसिद्ध चित्र वर्षा बिहार है।
●  बीकानेर शैली का मुख्य चित्रकार अलीराजा और उसका पुत्र हसनरजा था। रूकुनुद्दीन इस शैली का विख्यात चित्रकार था।
● बीकानेर के राजा रायसिंह संस्कृत का विद्वान तथा कला प्रेमी शासक था। जिन्होंने ज्योतिष रत्नाकर ओर रायसिंह महोत्सव ग्रंथ की रचना की।
● ऊँट की खाल पर चित्रांकन बीकानेर राज्य की अपनी विशेषता है।
● बीकानेर शैली में चित्रकला की अपेक्षा भवन निर्माण की कला में विशेष उन्नति हुयी। 
●  बीकानेर शैली के चित्रकार मुस्लिम थे, परन्तु विशुद्ध हिन्दू विषयों पर चित्र रचना करके पूर्ण उदारता एंव पूर्ण कौशल का परिचय दिया।
 

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