कोपन द्वारा जलवायु वर्गीकरण

                         यह उष्ण कटिबंधीय (मानसूनी) आर्द्र मुख्य जलवायु प्रदेश है जिसमें सबसे ठण्डे माह का तापमान 18 डीग्री सेंटीग्रेड से ऊपर रहता है तथा इसमें लघु शुष्क ऋतु भी होती है। ऐसी जलवायु भारत में कांकण एवं मालाबार तटवर्ती क्षेत्रों में पायी जाती है जिनमें गोवा दक्षिणी पश्चिमी महाराष्ट्र, पश्चिमी कर्नाटक, केरल तथा कन्याकुमारी तक फैला तमिलनाडु तट सम्मिलित है। इनके अतिरिक्त त्रिपुरा व दक्षिणी मिजोरम में भी यह जलवायु मिलती है। यहाँ शीतकाल शुष्क रहता है तथा ग्रीष्म काल एवं वर्षा काल में मानसूनी पवनों द्वारा वर्षा होती है। इस क्षेत्र में 200 से.मी. से अधिक वार्षिक वर्षा प्राप्त होती है, फलस्वरूप सदाबहार वनस्पति पायी जाती है। यह क्षेत्र सह्याद्री पर्वत का पश्चिमी भाग है, जो मानसूनी पवनों की अरब सागरीय शाखा के एकदम सामने पड़ता है तथा इसका दक्षिणी भाग मानसूनी पवनों के प्रवेश पर ही स्थित है, फलस्वरूप पर्याप्त वर्षा प्राप्त होती है तथा कर्क रेखा के दक्षिण में होने के कारण तापमान भी ऊँचा रहता है।
                    यह उष्ण कटिबंधीय जलवायु मुख्य जलवायु प्रदेश है। यहाँ भी तापमान अति ठण्डे महिने में 18 डीग्री सेंटीग्रेड से ऊपर रहता है। वह जलवायु प्रदेश केवल तापमान की दृष्टि से ही आर्द्र जलवायु प्रदेश से समानता रखता है जिसका प्रमुख कारण इन प्रदेशों का कर्क रेखा के दक्षिण में अवस्थित होना है। यद्यपि यह प्रदेश Amw से अधिक उष्ण हैं क्योंकि यह सागर तट से दूरी रखता है। इसमें प्रायद्वीपीय भारत के महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, दक्षिणी पूर्वी कर्नाटक, उत्तरी-पश्चिमी तमिलनाडु, उड़ीसा, दक्षिणी बंगाल, झारखण्ड, छत्तीसगढ़, दक्षिणी मध्य प्रदेश व गुजरात को सम्मिलित करते हैं, जहाँ शीतकाल शुष्क होता है। ग्रीष्मकाल एवं वर्षा ऋतु में वर्षा होती है। 100 सेमी समवर्षा रेखा इसे पूर्व एवं पश्चिमी भागों के रूप में दो बराबर भागों में बांटती है। इस प्रकार यहाँ औसत वार्षिक वर्षा 60 से 200 सेमी. के मध्य प्राप्त होती है। इस प्रकार यह मध्यम वर्षा वाला मुख्य जलवायु प्रदेश है। गुजरात के कच्छ काठियावाड में कम तथा तमिलनाडु के पूर्वी तट में औसत से अधिक भी वर्षा प्राप्त होती है। इस मुख्य जलवायु प्रदेश के घटकों का अंतर्सम्बन्ध वनस्पति के प्रकार एवं फसल प्रतिरूप के रूप में परिलक्षित होता है जबकि दीर्घकालिक रूप में मृदा निर्माण की प्रक्रिया में भी यहाँ की जलवायु की प्रवृति झलकती है।
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