प्रथम महायुद्ध के बाद भारतीय राजनीति में अनेक गुणात्मक परिवर्तन आए। इन गुणात्मक परिवर्तनों को दिशा प्रदान करने वाले नेताओं में महात्मा गांधी अग्रणी नेता रहे। 1919 के बाद 1948 में अपनी मृत्यु तक गांधीजी भारत के स्वतंत्रता आंदोलन एवं राजनीति में सर्वप्रथम नेता बने रहे। महात्मा गांधी के व्यक्तित्व का विकास प्रारंभ में एक वकील के रूप में हुआ। गांधी जी के व्यक्तित्व के निर्माण में उनके दक्षिण अफ्रीकी प्रवास (1893-1914) की उपलब्धियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
* महात्मा गांधी ने भारत के राष्ट्रीय आंदोलन में जिन तकनीकों का प्रयोग किया, उनमें सत्याग्रह एवं अहिंसा का सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्थान है। सत्याग्रह एवं अहिंसा गांधीजी के जीवन में गहन दर्शन के रूप में विकसित हुए।
* दक्षिण अफ्रीका में गांधी जी ने अपनी विचारधारा को प्रचारित एवं प्रसारित करने के लिए ' फीनिक्स सेटलमेंट ' एवं ' टॉल्स्टोय फार्म ' की स्थापना की। जिसमे कार्यकर्ताओं को अनुशासन के साथ बड़ी बड़ी सजगता से प्रशिक्षण दिया जाता था ताकि अपने कार्यकर्ताओं को सफल अहिंसक सत्याग्रहियों के रूप में विकसित किया जा सके।
* गांधी जी की विचारधारा में कुछ ऐसे सामाजिक आदर्श भी थे जो आम लोगों को आकर्षित करते थे। सामाजिक आदर्शों का उल्लेख महात्मा गांधी जी ने अपने प्रसिद्ध ग्रंथ ' हिंद स्वराज ' में किया है। इस पुस्तक को गांधीजी ने लंदन जाते समय लिखा था।
* गांधीजी के व्यक्तित्व का सबसे बड़ा आकर्षण उनकी राजनीतिक शैली थी, जिसने उन्हें कुछ ही समय में अखिल भारतीय स्तर पर लोकप्रिय नेता ही नहीं, अपितु ' त्राता ' के रूप में विकसित किया। वे आम भारतीय के समान जीवन बिताने में विश्वास रखते थे।