अधीनस्थ न्यायालय

  • न्यायिक प्रशासन के लिए राज्यों को विभिन्न जिलों में बांटा गया है। 
  • जिले के न्याय कार्य को देखने के लिए प्रत्येक जिले में जिला न्यायालय की नियुक्ति की जाती है ।
  • जिला न्यायाधीश की नियुक्ति राज्य के राज्यपाल द्वारा संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से की जाती है 
  • उन्हीं व्यक्तियों को जिला न्यायाधीश के पद पर नियुक्त किया जा सकता है जो कम से कम 7 वर्ष तक अधिवक्ता रहा हो अथवा जो संघ राज्य अथवा राज्य सरकार की सेवा में अधिकारी के रूप में कार्य कर चुका हो
  • जिला न्यायाधीश को दीवानी और फौजदारी दोनों मामलों में अधिकारिता प्राप्त होती है
  •  जिला न्यायाधीश जब दीवानी मामलों पर सुनवाई करता है तो उसे जिला न्यायाधीश और जब फौजदारी मामलों पर सुनवाई करता है तो उसे सत्र न्यायाधीश कहा जाता है। 
  • जिला न्यायाधीश के अंतर्गत विभिन्न स्तरों के अन्य अनेक न्यायिक अधिकारी होते हैं जैसे उप न्यायाधीश मुंसिफ मजिस्ट्रेट द्वितीय श्रेणी विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट इत्यादि
  • जिला न्यायाधीश के अतिरिक्त अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा उच्च न्यायालय तथा राज्य लोक सेवा आयोग के परामर्श पर किया जाता है। 
  • संविधान के अनुच्छेद 333 में अधीनस्थ अथवा जिला न्यायालय का प्रावधान किया गया है। 
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