प्रथम औद्योगिक नीति के बाद देश मे हुऐ अनेक महत्वपूर्ण परिवर्तनों के बाद नयी औद्योगिक नीति की आवश्यक्ता महसूस होने लगी। इसके मद्देनजर 30अप्रैल, 1956 को भारत की न ई औद्योगिक नीति घोषित की गई। जिसमे आधार भूत एंव भारी उद्योगों के विकास पर बल दिया गया। इस नीति के उद्योगो का वर्गीकरण निम्न तीन वर्गो मे किया गया।
प्रथम वर्ग- इस वर्ग मे अस्त्र शस्त्र और सैन्य सामाग्री , अणु शक्ति, लौह एंव इस्पात, भारी ढलाई, एंव भारी मशीने, खनिज तेल आदि 17 उद्योगों को शामिल किया गया।इन उद्योगो को पूर्णतया सरकार के अधिकार क्षेत्र मे रखने का प्रावधान किया गया है
द्वितीय वर्ग- इस वर्ग मे कुल 12 उद्योग ( मशीन औजार, अन्य खनिज एल्मुनियम एंव अन्य अलौह धातुऐं, लौह माश्रित धातु, औजारी खनिज, रसायन उद्योग औषधियाँ, उर्बरक, कृतिम, रबर, कोयले से बनने वाले कार्वनिक रसायन , रसायनिक घोल एंव सड़क परिवहन, और समुद्री परिवहन ) शामिल किया गया।
तृतीय वर्ग- शेष सभी उद्योग इस वर्ग मे रखे गए इसके संबन्ध मे सरकारी नियन्त्रण एंव नियमन की व्यवस्था कर इनके विकास एंव स्थापना का कार्य निजी क्षेत्र व सरकारी क्षेत्र को दिया गया।