क्रांतिकारी राष्ट्रवादियों का सबसे पहला केंद्र महाराष्ट्र था। पूना जिले के चित्तपावन ब्राह्मणों में सर्वप्रथम स्वराज के प्रति प्रेम की उग्र भावना का विकास हुआ था। तिलक ने, जो कि स्वयं चित्तपावं ब्राह्मण थे 1893 में गणपति त्योहार तथा 1895 में शिवाजी त्योहार मनाया। इससे महाराष्ट्र के लोगों में राष्ट्रवादी भावना का काफी विकास हुआ।
सर्वप्रथम 22 जून, 1897 को पूना में पूना प्लेग कमिश्नर मि. रेंड तथा उनके एक साथी लेफ्टिनेंट अयार्स्ट की चापेकर बंधुओं ने हत्या कर दी। रेंड की हत्या का तात्कालिक कारण उसका भारतीयों के प्रति प्लेग की स्थिति में अमानीय व्यवहार था। उस समय जबकि पूना तथा आसपास के क्षेत्रों में प्लेग फैला हुआ था, अंग्रेज सरकार ने प्लेग ग्रस्त लोगों की किसी भी प्रकार की सहायता करने के बजाय बहुत अधिक दुर्व्यवहार किए। तिलक ने तो यहां तक कहा कि, "आजकल नगर में फैली प्लेग अपने मानवीय रूपान्तरों से अधिक दयालु है।" चापेकर बंधुओं को फांसी की सजा दे दी गई तथा तिलक को भी सरकार विरोधी भड़काऊ लेख लिखने के जुर्म में 18 मास के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई।